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New Delhi, 03 November : सुप्रीम कोर्ट ने पुराने नोट बैंक में ना जमा करने वाले याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत दी है. चलन से बाहर हुए नोटों को जमा करने की अनुमति के लिये दायर 14 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी के केन्द्र के फैसले की वैधता के साथ ही इस पहलू पर भी पांच सदस्यीय संविधान पीठ विचार करेगी. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है वह अपनी याचिका को उस संवैधानिक पीठ के पास ले जाएं जो नोटबंदी पर सुनवाई कर रही है. याचिकाकर्ताओं ने 31 दिसंबर 2016 तक पुराने नोट जमा नहीं किए जाने के मामले में याचिका डाली थी. अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इन 14 याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
व्यक्तिगत याचिकाओं पर भी विचार करेगी संविधान पीठ
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने कहा कि संविधान पीठ उन लोगों की व्यक्तिगत याचिकाओं पर भी विचार करेगी जो भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तय समय सीमा में पुराने नोट जमा नहीं करा सके थे. याचिका दायर करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने आरबीआई अधिनियम या केन्द्र की आठ नवंबर, 2016 की अधिसूचना की संवैधानिक वैधता को चुनौती नहीं दी है, बल्कि वह अपने पास रखे चलन से बाहर हुए नोट जमा कराना चाहते हैं.
मेहनत की कमायी जब्त कर ली गयी हैः याचिकाकर्ता
एक याचिकाकर्ता के वकील प्रणव सचदेवा का कहना था, ‘‘विधि सम्मत प्रक्रिया के बगैर हमारी मेहनत की कमायी जब्त कर ली गयी है और हमें समुचित अवसर भी नहीं दिया गया.’’ पीठ ने याचिका दायर करने वालों से कहा है कि वह लंबित याचिकाओं में दो-तीन पन्नों की अर्जी दें जिनपर संविधान पीठ बाद में सुनवायी करेगी. इसके साथ ही न्यायालय ने 14 व्यक्तिगत याचिकाओं का निबटारा कर दिया.
एक याचिका को कोर्ट ने कर दिया था खारिज
इससे पहले 500-1000 के पुराने नोट बदलने को लेकर दाखिल एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड धारक महिला की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा था कि अगर एक केस में लोगों को पुराने नोट बदलने का आदेश देंगे तो अव्यवस्था फैल हो जाएगी. ऐसे में पुराने नोट बदलने के लिए विंडो खोलने के लिए नहीं कहा जा सकता.




