News Wing Latehar, 27 October: लातेहार और डाल्टनगंज सीमा पर स्थित पलामू के फुलबरिया गांव में दो दिवसीय किला मेला की शुरुआत शुक्रवार से हो गयी. मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है. ऐतिहासिक किला मेला देखने के लिए हजारों लोग दूर-दूर से पहुंचे. मेले में चेरी दाई की पूजा-अर्चना की गयी व झांकी निकाली गई. वहीं आदिवासी समूह के लोग मांदर की थाप पर थिरकते रहे. पलामू किला मेला को देखने के लिए हजारों लोग अपने निजी वाहन, आटो, साइकिल, ट्रैक्टर, जीप व पैदल मेला स्थल पर पधारे थे. लोगों ने राजा मेदिनीराय द्वारा बनाए गए पुराना व नया पलामू किला और कमलदह झील का भी भ्रमण किया. परंपरा के मुताबिक लोगों ने यहां तलवार की भी खरीदारी की.
फुलबरिया गांव के शिव मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
राजा मेदिनीनगर की याद में हर साल छठ पूजा के बाद यह मेला लगता है. मेले में पलामू प्रमंडल के सभी गांव से आदिवासी समुदाय के लोग पहुंचते हैं. सतबरवा प्रखंड के फुलबरिया गांव में लगने वाले दो दिवसीय मेला में श्रद्धालु शिव मंदिर में पूजा करते हैं और पूजा के बाद उंचे पहाड़ पर स्थति किले में जाकर घूमते हैं. बताया जाता है कि राजा मेदिनी राय की पत्नी कमलदह झील में ही स्नान करने जाती थी. इस कारण कमलदल झील देखने को ले ज्यादा व्याकुल दिखे.
छठ के बाद शिव मंदिर में पूजा करते थे राजा मेदिनी
ग्रामीणों कि मानें तो पलामू किला के राजा मेदनी राय अपने पूरे परिवार के साथ छठ करते थे और किले के निचे ओरंगा नदी के तट पर पूजा करने के बाद फुलबरिया ग्राम में शिव मंदिर में पूजा करते थे. तब से यह परम्परा जारी हो गयी और हर वर्ष मेला लगने लगा. राजा मेदनी राय पहले ऐसे राजा थे जिनके कार्यकाल में कभी भी ग्रामीणों के घर में दूध दही कि कमी नहीं होती थी. हर ग्रामीण के पास दुधारू पशु रहता था.




