Md. Asghar Khan
Ranchi, 08 October: सरकार को सौंपी गई ‘नई हज नीति (2018-22)’ का विरोध शुरु हो गया है. आम मुस्लिमों के अलावा हज कमेटी भी इसका विरोध कर रही है. मेहरम और हज इम्बारकेशन पॉइंट की संख्या को घटाने से लेकर मेहरम और समुद्री जहाज से हज यात्रा की योजना से लोग समहत नहीं है. इसे लेकर मुस्लिम संस्थाएं केंद्र सरकार और राज्य सरकार से बात करने की योजना बना रहीं है. वहीं हज सब्सिडी खत्म किए जाने प्रस्ताव का स्वागत किया जा रहा है.
मेहरम शराई मामला है, हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
नई हज नीति में 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं का बिना मेहरम के हज पर जाने के प्रस्ताव पर मुस्लिम समाज में रोष है. सेंट्रल मुहर्रम कमेटी रांची के महासचिव अकिलुर रहमान ने कहा कि ये शरियत का मामला है, इसमें किसी भी तरह का हस्तेक्षप नहीं होना चाहिए. किसी भी उम्र की महिला बिना मेहरम के हज पर जा ही नहीं सकती है. वहीं मरहबा ह्युमन सोसाईटी रांची के नेहाल अहमद ने कहा कि हज नीति निंदनीय है. इससे यात्रियों का भला नहीं होना वाला है. सरकार से अनुरोध है कि मेहरम का क्राइटेरिया तय ना किया जाए.
इम्बारकेशन पॉइंट किसी भी हाल जाने नहीं दिया जायेगा
झारखंड राब्ता हज कमेटी के महासचिव हाजी मोख्तार अहमद ने कहा कि रांची का हज इम्बारकेशन पॉइंट किसी भी हाल में कोलकत्ता नहीं जाने दिया जायेगा. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार बात की जाएगी. इसके हट जाने से झारखंडवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कई साल के संघर्ष के बाद झाखंड को प्रास्थान स्थल मिला. इसलिए जरुरत पड़ने पर झारखंड की अवाम सड़क पर भी उतर सकती है. गौरतलब है कि नयी नीति के हिसाब देश भर के 21 इम्बारकेशन पॉइंट घटकर नौ हो जाएंगे, जिसमें रांची का पॉइंट कोलकाता शिफ्ट हो सकता है.
21 वीं सदी के दौर में पीछे क्यों जाए जनता
झारखंड स्टेट हज कमेटी के सदस्य सह प्रवक्ता खुर्शीद हसन रुमी ने नई हज नीति का विरोध किया. कहा कि नई नीति के मुताबिक हवाई जहाज की जगह पानी वाली जहाज से यात्रा करना हस्यासपद है. 21 वीं सदी में लोग जी रहे हैं और उन्हें पीछे जाने को कहा जा रहा है. रुमी ने मेहरम और रांची से इम्बारेशन पॉइंट हटाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसपर सरकार गंभीरता से विचार करे. झारखंड का इम्बारकेशन हटाना और मेहरम पर छेड़छाड़ करने से जनता आंदोलन करने मजबूर हो सकती है.
नये हज नीति में क्या है प्रस्ताव
‘नई हज नीति (2018-22)’ को अगर केंद्र सरकार लागू करती है तो इस प्रकार तब्दिली होगी. हज प्रस्थान स्थलों की संख्या को 21 से हटाकर नौ किया जाएगा, इसमें दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई , चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलूरू और कोच्चि होंगे. मुस्लिम आबादी के अनुपात से हाजियों का कोटा तय होगा. मेहरम का कोटा 200 से बढ़ाकर 500 और 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बिना मेहरम के हज पर जाएंगी. सरकार के तरफ से मिलने वाली सब्सिडी खत्म हो जाएगी.
हज कमेटी की बैठक में नई हज नीति का हुआ विरोध
नई हज नीति के विरोध के बीच रविवार को आड्रे हाउस स्थित हज कार्यालय में आवश्यक बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए हज कमेटी के अध्यक्ष मंजूर अहमद अंसारी ने हज सब्सिडी खत्म करने के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन रांची इम्बारकेशन को रद्द करने का प्रस्ताव का विरोध जताया. बैठक में सर्वसम्मति तय हुआ कि हज कमिटी का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही दिल्ली जाकर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोख्तार अब्बास नकवी से मिलेगा. जिसमें रांची से इम्बारकेशन पॉइंट नही हटाने का अनुरोध किया जायेगा.
60 लाख मुसलमानों की भावानों से सीएम को कराया जायेगा अवगत
झारखंड स्टेट हज कमेटी ने बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार से रांची हज इम्बारकेशन पॉइंट नहीं हटाये जाने की मांग की गई. वहीं इस मांग को लेकर हज कमेटी के लोग मुख्यमंत्री से मिलेंगे. उनको राज्य के 60 लाख मुसलमानों की भावनाओं से अवगत कराया जायेगा. बैठक में हज यात्रा 2017 की समीक्षा कर संतोष व्यक्त किया गया. बैठक में मुख्य हज कमेटी के सदस्य सह विधायक आलमगीर आलम, खुर्शीद हसन रुमी, शेख बदरुद्दीन, ऐनुल होदा, महमुद आलम अंसारी, हाजी शौकत अली, मौलाना कारी अयुब, कार्यपालक पदाधिकारी राज्य हज समिति, नुरुल होदा तथा विशेष आमंत्रित के रुप में नईमुद्दीन खान, शफीक अंसारी, नसीम अहमद शामिल थे.




