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Jamtara, 01 October : त्याग और बलिदान के पर्व मुहर्रम को लेकर जामताड़ा के विभिन्न समितियों ने जुलूस निकाला. जुलूस के दौरान या अली या हुसैन के नारों से सारा माहौल गुंजायमान हो उठा. मुहर्रम के जुलूस में इस्लाम धर्मावलंबियों के साथ-साथ विभिन्न धर्म के लोग भी शामिल हुए. मान्यता है कि मुहर्रम की पहली तारीख से लेकर 10 वीं तारीख तक रोजे रखने तथा मन्नत मांगने से सबकी मुरादें पूरी होती है. कुछ लोग मन्नत के तौर पर मुहर्रम के महीने में नंगे पांव इमाम हुसैन का नारा लगाते हुए एक इमामबाड़ा से दूसरे इमामबाड़ा की परिक्रमा करते हैं. इस दौरान वे पांच दिनों तक जमीन पर सोते हैं तथा चावल का भोजन करते हैं.
भाला, गड़ासा, लाठी, तलवार आदि का दिखाया करतब
मुहर्रम की दसवीं तारीख को जामताड़ा में जुलूस निकाली गयी. जुलूस में शामिल लोग या अली या हुसैन के नारे लगा रहे थे. लोग विभिन्न स्थानों पर रुक-रुक कर भाला, गड़ासा, लाठी, तलवार आदि का करतब दिखा रहे थे. जुलूस में पारंपरिक हथियारों के प्रदर्शनी के साथ हैरतअंगेज खेल दिखाया गया. कहा जाता है कि हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार के साथ कर्बला के मैदान में शहीद कर दिए गए थे. लेकिन बातिल के आगे अपने सिर नहीं झुकाया. इस्लाम को मानने वाले लोग हजरत हुसैन की याद में जुलूस के साथ मैदान-ए-जंग का दृश्य बड़े ही आकर्षक और अनोखे अंदाज में पेश किया.
सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम
शहर के पाकडीह, सरखेलडीह, मियांडीह, बुधुडीह, दुलाडीह, राजबाड़ी, रामुडंगाल, जीतूडंगाल, चिरुनबांध आदि इलाकों से लोग ताजिया के जुलूस निकाल कर सुभाष चौक पहुंचे. उसके बाद जुलूस सुभाष चौक से निकलकर बाजार रोड होते हुए इंदिरा चौक पहुंचे. उसके बाद वहां खेल प्रदर्शन करते हुए फिर पुनः वापस सुभाष चौक पर अखाड़ा लगाया गया. सुभाष चौक पर अखाड़ा का खेल देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. कई लोग पेड़ और छत पर मुहर्रम के मौके पर जिले के विभिन्न इलाकों में कौमी एकता का अद्भुत नजारा दिखाई दिया. जामताड़ा में दोनों समुदाय हिंदू मुस्लिम मिलकर मुहर्रम मनाया. मुहर्रम को शांतिपूर्वक संपन्न कराने को लेकर पुलिस प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किया था. विभिन्न स्थानों पर मजिस्ट्रेट तथा पुलिस बल की नियुक्ति की गई थी. इस दौरान पुलिस प्रशासन शरारती तत्वों तथा उन्माद फैलाने वालों पर विशेष निगाह रख रही थी. प्रशासन ने शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए कंट्रोल रुम की व्यवस्था की थी. जुलूस के साथ-साथ काफी संख्या में पुलिस बल भी तैनात थें.




