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Ranchi, 14 September : सीएम रघुवर दास ने कहा कि हिंदी ही भारत को एकसूत्र में पिरो सकता है. हिंदी भारतीय संस्कृति की पहचान है. हिंदी का प्रश्न भारत की अखंडता और एकता का प्रश्न है. राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिये हिंदी को समृद्ध बनाना हम सब का परम दायित्व है. भाषा परंपरा और संस्कृति किसी भी देश की पहचान होती है. दुनिया में वही देश विकसित है, जो अपनी भाषा संस्कृति और परंपरा को बरकरार रखे हुए है. 600 साल की दासता के बाद भी भारत अपनी भाषा संस्कृति और परंपरा के कारण बचा रहा. हमारे सामने इसे आगे भी बचाए रखने की कड़ी चुनौती है. मुख्यमंत्री रघुवर दास हिंदी दिवस पर झारखंड मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रभाषा हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को भी प्राथमिकता दी है. ये भाषा झारखंड की पहचान हैं. इन्हें बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाये हैं. राज्य स्तरीय परीक्षाओं में इन भाषाओं को शामिल किया गया है. हमारे यहां भी कुछ लोग हमारी परंपरा और संस्कृति को नष्ट करने में लगे हैं. लेकिन हम सब को मिल कर उनके मंसूबों को पूरा होने नहीं देंगे.
कार्यक्रम में कई लोगों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सर्वश्रेष्ठ चयनित निबंध एवं लघुकथा के रचनाकारों को पुरस्कृत किया. निबंध प्रतियोगिता के लिये निर्धारित तिथि तक कुल 212 प्रविष्टियां प्राप्त हुई. स्क्रिनिंग के बाद सर्वश्रेष्ठ निबंध एवं लघु कथा के चयन के लिये गठित त्रिस्तरीय चयन समिति ने आशुतोष कुमार चौधरी, सरायकेला-खरसावां को वस्तु एवं सेवाकर, एक कर, एक बाजार और एक राष्ट्र विषय पर निबंध लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ चुना गया है. वहीं लघु कथा लेखन के लिये गोड्डा की मीनाक्षी कुमारी और शुभम प्रिया को समान अंक प्राप्त हुए हैं. इस चयन समिति में हिन्दी के विद्वान डॉ अशोक प्रियदर्शी, डॉ रविभूषण और डॉ हरेराम त्रिपाठी चेतन सम्मिलित थे. कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यविद् अशोक प्रियदर्शी सहित हिंदी के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करनेवाले लोगों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया.
ये थे उपस्थित
कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्त एनएन पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार, कार्मिक व राजभाषा विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे, साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी समेत बड़ी संख्या में गण्यमान्य लोग उपस्थित थे.




