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Ranchi, 07 September: राज्य सरकार ने आकिरकार मान ही लिया कि हाल के दिनों में राज्य में कुपोषण की वजह से ही बच्चों की मौत हुई है. एमजीएम जमशेदपुर में 30 दिनों में 60 बच्चों की मौत के अलावा रांची के रिम्स में 28 दिनों में 133 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में गठित जांच कमेटी ने अपनी रिर्पोट अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को सौंप दी है.
क्या है रिपोर्ट में
रिर्पोट में कहा गया है कि बच्चों की मौत कुपोषण की वजह से हुई है. जांच कमेटी ने चिकित्सकों को क्लीन चीट देते हुए कहा कि चिकित्सकों की लापरवाही से बच्चों की मौत नहीं हुई है. रिर्पोट में कहा गया है कि अस्पतालों में बच्चे गंभीर हालत में भर्ती कराये गये थे. कुल 60 बच्चों में से 40 बच्चों की मौत एनआइसीयू में हुई. वहीं 12 बच्चे पीआइसीयू में भर्ती थे. जिसमें से आठ की मौत हो गयी. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी पहले तो यह स्वीकार कर ही नहीं रहे थे कि कुपोषण की वजह से इतने बच्चों की मौत हुई है. बाद में प्रमाण के बाद माना था कि रिम्स में पिछले महीने 103 बच्चों की मौत हुई थी.
जन्म के समय ही कम वजन था बच्चों का
कमेटी की रिर्पोट में कहा गया है कि एनआइसीयू में जितने भी बच्चे थे वे लो बर्थ वेट थे. यानि जन्म के समय ही औसम से कम वजन के बच्चे थे. जन्म से पूर्व माता जब कुपोषण की शिकार होती है तो उसका असर उनके होने वाले बच्चे पर भी पडता है. जिसकी वजह से जन्म के समय बच्चों का वजन औसत वजन से कम रहता है. गर्भवती महिलाओं को एंटी नेटल चेकअप भी नहीं कराया जाता है.
कुपोषण ही असली वजह
बच्चों की मौत के बाद सरकार की नींद खुली थी और तत्काल जांच के आदेश दिये गये थे. राज्य के स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख सुमंत मि़श्रा की अध्यक्षता में जांच दल बना था. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को भी जमशेदपुर जाकर जांच करने का निर्देश दिया था. सुधीर त्रिपाठी ने भी माना की कुपोषण की वजह से बच्चों की मौत हुई है. दोनों जांच दल की रिर्पोट साफ है कि बच्चों की मौत की वजह कुपोषण ही है.
खून की कमी, पूर्ण टीकाकरण का है आभाव
झारखंड पूर्ण टीकाकरण के मामले में काफी पीछे है. यहां मात्र 61-9 फीसदी बच्चों को पूर्ण टीकाकरण का लाभ मिला है. जबकि बिहार में यह आंकडा 61-7 का है. टीकाकरण के मामले में पूरे देश में झारखंड का स्थान 17वां है. साथ ही झारखंड में 45-3 फीसदी बच्चे उम्र के अनुसार लंबाई में अब भी छोटे है. जबकि बिहार में यह आंकडा 61-7 का है. खून की कमी में झारखंड देश के पांच राज्यों में शामिल है. यहां के 69-9 फीसदी बच्चों को खून की कमी है. ऐसा नहीं है कि बिहार के बच्चों में खून की कमी नहीं है. लेकिन यहां भी आंकडा झारखंड से बेहतर ही है. बिहार में 63-5 बच्चों को खून की कमी है.
झारखंड का अभिशाप है कुपोषण
कुपोषण झारखंड की प्रमुख समस्याओं में से एक है और सरकार की तरफ से ज्यादा जोर लगाने के बाद भी कई वर्षों से यह राज्य का पीछा नहीं छोड रहा है. यूनिसेफ ने हाल ही में एक रिर्पोट जारी किया जिसमें कहा गया कि राज्य सरकार कुपोषण मुक्त करने के लिए कई प्रोग्राम चला रही है. लेकिन बावजूद इसके स्थिति जस की तस है. यूनिसेफ की रिर्पोट के अनुसार झारखंड के आधे बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है. जिससे उनका विकास सही रूप में नहीं हो पा रहा है.




