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सालभर पहले हुई थी वज्रपात से मौत, अब मिला मुआवजा

Mrityunjay Srivastav

Ranchi, 23 August: झारखंड में वज्रपात से होने वाली मौत के बाद मुआवजा लेने के लिए दर-दर भटकना पडता है. विभाग का कई बार चक्कर लगाने के साथ-साथ अधिकारियों की मिन्नत के बाद ही मुआवजा नसीब होता है. ऐसा ही हुआ है झारखंड आपदा प्रबंधन विभाग में. 2016 में प्राकृतिक आपदा से लगभग 270 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से कुछ को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन कई ऐसे लोग ऐसे थे जिन्हें आपदा प्रबंधन ने अभी मुआवजा की राशि दी है. गौरतलब है कि राज्य में वज्रपात से हर साल तकरीबन 300 लोगों की मौत हो जाती है. जुलाई और अगस्त के महीनों में बिजली गिरने से सबसे ज्यादा मौत होती है. सरकारी आंकडे बताते है कि इस वर्ष 76 लोगों की मौत वज्रपात से हुई है. 

वज्रपात के मौत होने पर चार लाख का मिलता है मुआवजा

वज्रपात के हुई मौत आपदा के दायरे में आता है. किसी की मौत होने पर उसके परिवार को चार लाख रूपये मुआवजा के तौर पर दिया जाता है और घायलों को 12 हजार से लेकर दो लाख तक की मुआवजा राशि दी जाती है. साथ ही मकान की क्षति से लेकर मृत पशुओं के आश्रितों को भी मुआवजा देने का प्रावधान है. गृह और आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव जटाशंकर चैधरी ने बताया कि वज्रपात से हुई क्षति का एक भी मामला पेंडिंग नहीं है. जुलाई तक सभी पीडित परिवार को मुआवजे की राशि दे दी गयी है. एक सप्ताह के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान किया जा रहा है.

जिलों में आपदा की राशि चार गुणा बढ़ी

राज्य में आपदा से निपटने के लिए विभाग के पास पर्याप्त राशि है. जिलों में भी आपदा की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन बेहतर ढंग से हो इसके लिए नयी व्यवस्था की गयी है. जिलों को इसके लिए अब एक करोड रूपये निर्गत किये गये है. पूर्व में 25 लाख रूपये ही जिलों को आपदा से निपटने के लिए दिये जाते थे.

इमरजेंसी सेंटर जल्द होगा शुरू

आपदा की स्थिति में अगर दूरसंचार व्यवस्था ठप हो जाये तो उसके लिए हाईटेक व्यवस्था बहाल की जा रही है. राज्य के तीन जिले धनबाद, जमशेदपुर और देवघर में इमरजेंसी सेंटर स्थापित किये जायेंगे. फिलहाल वि-सैट लगाने का काम हो चुका है. इस सेंटर से माध्यम से दूरसंचार व्यवस्था के ठप हो जाने की स्थिति में सैटेलाईट फोन से संपर्क स्थापित किया जायेगा, साथ ही हर जिले में रिर्सोस इन्वेंटरी भी बना दी गयी है. हर जिलों ने अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधन को लिखित रूप में विभाग को उपलब्ध करा दिया है.

वज्रपात का पता लगाने के लिए लगेगा लाईटनिंग एसेस्टर 

वज्रपात का पुर्वानुमान के लिए लाईटनिंग एसेस्टर लगाया जायेगा. जिसका परीक्षण फिलहाल किया जा रहा है. इस उपकरण के लग जाने से वज्रपात से होने वाली क्षति को रोका जा सकेगा.

लोगों से अपील

बारिश होने पर पेड के नीचे न खडे हों विभाग के अपर सचिव ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि जब बारिश होती है तो कभी भी पेड के नीचे नहीं खड़ा होना चाहिए. ऐसी स्थिति में खुले आसमान के नीचे ही बैठना बेहतर होता है. साथ ही लोहे की डंडी वाले छाता का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए.

एसडीआरएफ में होंगे जैप के जवान

राज्य में जल्द ही एसडीआरएफ यानि स्टेट डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स का गठन होगा. जिसमें जैप से जवान को तीन साल के लिए प्रतिनियुक्त किया जायेगा. उन्हें केंद्रीय स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. गौरतलब है कि राज्य गठन के 17 सालों के बाद भी एसडीआरएफ का गठन नहीं हो पाया है. राज्य में कोल, माईका माइंस में हमेशा हादसा होता रहता है. राज्य के 5 जिलों में बाढ़ का खतरा भी बना रहता है. बांध से पानी छोडे जाने की स्थिति में भी निचले इलाकों में बाढ का खतरा मंडराता रहता है. ऐसे में एसडीआरएफ की बहुत ही जरूरत है.

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