रांची: हजारीबाग के बरवाडीह प्रखंड के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में पुलिस लाठीचार्ज की घटना की जांच कर लौटी मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों की टीम ने आज अपनी रिपोर्ट जारी कर दी। मुख्य तथ्यों की जानकारी देते हुए मानवाधिकार कार्यकत्र्ता फादर स्टेन स्वामी ने कहा कि टीम ने जांच में पाया है कि एनटीपीसी द्वारा भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों और किसानों के पक्ष में खड़े जनसंगठनों से जुड़े लोगों पर लगाये गये फर्जी मुकदमों से जाहिर होता है कि इसमें लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है। फादर स्टेन ने आगे कहा कि जमीन अधिग्रहण के लिए कानूनी और सांविधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है, लेकिन इसम मामले में ऐसा नहीं हुआ है। जांच टीम ने यह जानकारी देने के लिए
रविवार को मेन रोड के निकट काली मंदिर लेन स्थित भाकपा माले कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया था।
गौरतलब है कि पुलिस ने 17 मई, 2016 को एनटीपीसी की कर्णपुरा पकरी बरवाडीह कोल परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों को बेरहमी से पीटा था। जांच टीम में एआईपीएफ, विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन और कुछ अन्य मानवाधिकार कार्यकत्र्ता शामिल हुए थे। टीम के सदस्यों में फादर स्टेन स्वामी, अरविंद अविनाश, प्रशांत राही, अनिल अंशुमन और शिक्षा राही शामिल थीं।
प्रेस कांफ्रेंस में टीम ने अपनी मांगें रखी हैं जो निम्नलिखित हैं:
– 17 मई 2016 को बड़कागांव प्रखंड के चिरूडीह तिलैयाटांड में शांतिपूर्ण धरना दे रहे किसानों व गांवों में घुसकर लाठी चार्ज करने के जिम्मेदार अधिकारियों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाई होनी चाहिए।
– जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों, जन संगठनों पर प्रशासन द्वारा लगाये गये फर्जी मुकदमे वापस लिये जायें। हजारीबाग जेल में बंद डॉ मिथिलेश दांगी और छह अन्य ग्रामीण विचाराधीन बंदियों को रिहा किया जाये।
– खनन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए अनिवार्य वैधानिक प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों की आम सहमति लिये बगैर परियोजना कार्य किये जाने पर रोक लगायी जाये।
– बड़कागांव की अधिकांश जनता अपनी बहु फसली जमीन नहीं देना चाहती है। इसलिए भूमि अधिग्राहण के मुद्दे पर जनमत संग्रह करवाया जाये।




