रांची : विपक्षी दलों ने पिछले सप्ताह पारित श्रम संबंधित दो विधेयकों के खिलाफ सोमवार को प्रदर्शन किया, जिसके कारण झारखंड विधानसभा में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई और तीन बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ठेका श्रमिक संशोधन अधिनियम 2015 और कारखाना संशोधन विधेयक 2015 को श्रमिक विरोधी करार दिया, जिसे शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित किया गया था।
झारखंड के संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने विपक्ष को शांत कराने की कोशिश करते हुए कहा, “विधानसभा खास नियमों पर चलती। विधेयक पारित हो चुके हैं। विपक्ष को उस समय संशोधन लाना चाहिए था, जब विधेयक शुक्रवार को पेश किए गए थे।”
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और झामुमो के नेता हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे को सुबह 11 बजे उस समय उठाया, जब सदन की बैठक दो दिनों के अवकाश के बाद शुरू हुई। अन्य विपक्षी सदस्यों ने अपना विरोध जताने के लिए तख्तियां लहराईं।
हेमंत ने कहा, “ठेका श्रमिक संशोधन अधिनियम 2015 और कारखाना संशोधन अधिनियम 2015 श्रमिक विरोधी हैं। सरकार विधेयक को पारित कर पाई, क्योंकि सदन में उसे बहुमत प्राप्त है। लेकिन दोनों विधेयक राज्य के श्रमिकों और जनता के खिलाफ हैं।”
झामुमो, कांग्रेस और अन्य दलों के सदस्य सदन के बीचो बीच पहुंच गए और आधा घंटे तक नारेबाजी करते रहे और तख्तियां लहराते रहे।
विधानसभा अध्यक्ष ने दूसरी बार दोपहर तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
दोपहर में सदन की बैठक तीसरी बार शुरू हुई। लेकिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही फिर अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
झारखंड के संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष को दोपहर में शांत कराने की कोशिश की लेकिन कोशिश बेकार साबित हुई।
बाद में सोरेन ने संवाददाताओं से कहा कि विधेयक जनता के खिलाफ हैं, क्योंकि कारखानों को ठेका श्रमिकों को रखने की न्यूनतम सीमा 10 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है और ऊपरी सीमा 20 से 40 कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अनुरोध किया कि विधेयकों को प्रवर समिति के पास भेजा जाए, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया।
सत्ताधारी दल के सदस्यों ने विपक्ष के आचरण को असंवैधानिक बताया।




