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होटवार जेल में कैदियों से मिली अल्‍पसंख्‍यक आयोग की टीम

रांची : झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉ शाहिद अख्तर के नेतृत्व में आयोग की एक टीम ने बृहस्‍पतिवार (दो जुलाई, 2015) को रांची स्थित होटवार जेल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में जेल अधीक्षक अशोक चौधरी ने टीम को बताया कि होटवार जेल में अभी 3469 कैदी हैं, जिसमें 3323 पुरूष और 146 महिलाएं हैं। कुल कैदियों में मुस्लिम कैदियों की संख्या 365 है और 104 ईसाई कैदी हैं।

अध्यक्ष ने यह भी पूछा कि कैदियों के लिए नमाज पढ़ने, रोजा रखने, सेहरी एवं इफ्तार आदि की उचित व्यवस्था है या नहीं। इस दौरान उन्होंने कैदियों को भी बुलाने का निर्देश दिया। जिसके बाद कैदियों को वहां लाया गया। कैदियों ने अध्‍यक्ष को बताया कि जेल प्रशासन ने इस संबंध में समुचित व्यवस्था की है। रोजा रखने वाले कैदियों को किसी भी तरह की कोई कठिनाई नहीं है। ईसाई कैदियों ने अध्‍यक्ष को बताया कि प्रत्येक रविवार को प्रार्थना के लिए फादर आते हैं। उन्‍होंने किसी तरह की असुविधा होने की बात से इंकार किया।

जेल में बंद कैदियों ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि उम्र कैद की सजा काट रहे कैदियों को नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करने का अवसर देना चाहिए। अध्यक्ष महोदय ने उन्हें आश्वस्त किया कि ऐसे कैदी जो 15 साल से ज्यादा समय से जेलों में बंद है उन्हें मुक्त कराने के लिए आयोग अपने स्तर से प्रयास करेगा।

अध्यक्ष के यह पूछने पर कि कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जेल में कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है या नहीं। अधीक्षक ने कहा कि जेल में कैदियों को इलेक्ट्रिशियन, फीटर, कम्प्यूटर आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा हर महीने की 16-17 और 29-30 तरीख को झारखण्ड सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की जानकारी देने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। उन्‍होंने बताया कि अभी तक कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, सहकारिता विभाग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है, जिसमें 290 कैदी शामिल हुए।

आयोग के अध्यक्ष ने केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही शहरी आजीविका मिशन, ग्रामीण आजीविका मिशन और कल्याण विभाग द्वारा चलाये जा रहे कौशल कार्यक्रम के संबंध में जानना चाहा। जिसके जवाब में अधीक्षक ने कहा कि इस तरह का कार्यक्रम जेल में नहीं चलाया जा रह है। जेल अधीक्षक ने टीम को बताया कि होटवार जेल में 581 स्वीकृत पदों में से मात्र 35 कर्मी कार्यरत हैं। कर्मियों की कमी को देखते हुए जरूरत के मुताबिक कई कर्मियों को दैनिक मजदूरी पर रखा गया है।

आयोग के अध्यक्ष ने उन्हें जानकारी दी की आयोग इस संबंध में बैठक आयोजित करेगा। बैठक में प्राधिकारियों से इस योजना का लाभ जेल में बंद कैदियों को भी दिलाने का निर्देश दिया जाएगा, जिससे जेल से बाहर आने के बाद कैदी प्रशिक्षण लेकर रोजगार हासिल कर सकेंगे।

अध्यक्ष ने जेल में बंद ऐसे कैदियों जो बराबर जेल आते जाते रहते हैं, उनके लिए काउंस्‍लर की नियुक्ति का निर्देश दिया। इसके अलावा सभी धर्मों के धर्मगुरुओं को भी सप्ताह में एक दिन बुलाकर कैदियों को धार्मिक ज्ञान देने की बात उन्‍होंने कही।

आयोग की टीम ने जेल की पुस्तकालय को भी देखा। जेल प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि यहां सभी धर्मों की किताबें उपलब्ध हैं। कैदियों को ये किताबें पढ़ने के लिए निःशुल्क उपलब्ध करायी जाती हैं। आयोग की टीम में सदस्य असगर मिसबाही, सदस्य सरदार शैलेन्द्रर सिंह, आयोग के सचिव मनौवर आलम भी शामिल थे।

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