भुवनेश्वर : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को स्वामी विवेकानंद की शिक्षा को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘जीव ही शिव है’ और इसीलिए सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों की मदद कर देश निर्माण में भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि लोगों की शिक्षा से ही भविष्य तय होगा। राष्ट्रपति ने ओडिशा के कालाहांडी के रामपुर में रामकृष्ण आश्रम में विवेकानंद स्मारक सभागार का शुभारंभ किया। यह परियोजना स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती के अवसर पर दुनिया भर में चलाए जा रहे कार्यक्रमों में से एक है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद को श्रृद्धांजलि दी और सर्वाधिक महत्वपूर्ण विचार ‘जीव ही शिव है’ का उल्लेख किया, जो स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से ग्रहण किया था।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में देव होता है। स्वामी विवेकानंद ने सीख दी कि आम आदमी की सेवा यह मानते हुए की जानी चाहिए कि भगवान के अवतार की सेवा की जा रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय आबादी, खासतौर से बच्चों और युवा वर्ग के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य उपलब्ध कराने के लिए असंख्य सुविधाओं की स्थापना से स्वामी विवेकानंद जी ने उनके आश्रम को स्वामी जी के विचारों एवं शिक्षा के कार्यान्वयन का साधन बनाया।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने संकेत किया था कि देश का भविष्य उसके लोगों और उन्हें मिलने वाली शिक्षा पर निर्भर करता है। ऐसे पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए इन परियोजनाओं से स्वामी विवेकानंद और उनके आश्रम सहयोगी स्वामी विवेकानंद के स्थापित लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने उड़िया भाषा में ‘भारत परिक्रमा- कालाहांडी से कश्मीर और कन्याकुमारी’ नामक प्रकाशन भी ग्रहण किया। इसे स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती के अवसर पर आश्रम ने तैयार किया है। (आईएएनएस)




