रांची: शिक्षा मंत्री द्वारा टेट परीक्षा में भोजपुरी मगही माध्य म से उत्ती़र्ण उम्मीदवारों की नियुक्ति पर सवाल उठाने का मामला ठंढ़ा पड़ता नहीं दिख रहा। स्वमयं शिक्षा मंत्री गीताश्री उरावं ने रविवार को फिर कहा कि भोजपुरी मगही को संविधान की 8वीं अनुसूची में भाषा का दर्जा प्राप्तर नहीं है। इसलिए इसपर कोई विवाद होना ही नहीं चाहिए। वह इस बात की जांच कराना चाहती हैं कि किस आधार पर इन बोलियों में टेट परीक्षा की अनुमति दी गई। गीताश्री ने कहा कि इन बोलियों का उदगम स्थइल बिहार है फिर भी वहां इन्हें मान्यता नहीं है।
मंत्री के रवैये से नाखुश हेमन्त सरकार का एक अन्यन सहयोगी दल राजद खफा है। राजद प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिहं ने कहा कि मंत्री उस संवैधानिक शपथ पर कायम रहें जो उन्होंेने पद हासिल करने से पहले ली, जिसमें ‘भेदभाव न करने की घोषणा’ होती है। सिंह ने कहा कि उन्हें राजधर्म का तो ज्ञान होना चाहिए। एक सवाल के जवाब में गिरिनाथ सिंह ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह इस मुद्दे पर विरोध शुरू करेंगे।
(इसी प्रसंग में गीताश्री के साथ न्यूज विंग की खास बातचीत यहां पढें।)




