वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के एक शीर्ष सहयोगी ने कहा कि अमेरिका न सिर्फ भारत की तरक्की को स्वीकार करता है, बल्कि भारत के नई शक्ति के रूप में उभरने का दिल से समर्थन करता है। ओबामा के इस सहयोगी ने उभरती शक्तियों के साथ घनिष्ठ साझेदारी को एशिया-प्रशांत के लिए अमेरिकी नीति का एक प्रमुख स्तम्भ बताया।
ओबामा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थॉमस डोनिलॉन ने सोमवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी नीति पर चर्चा करते हुए कहा, “एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत तथा अमेरिका की रुचियां आपस में तेजी से एक हुई हैं। इस क्षेत्र के लिए भारत बहुत कुछ कर सकता है तथा इस क्षेत्र में भारत के लिए लाभ की बहुत संभावनाएं हैं।”
डोनिलॉन ने याद दिलाया कि उदाहरण के लिए पिछले वर्ष भारत-आसियान के बीच व्यापार 37 प्रतिशत बढ़कर 80 खरब डॉलर हो गया था।
डोनिलॉन ने कहा, “दक्षिण पूर्व एशिया की शुरुआत पूर्वोत्तर भारत से होती है और हम म्यांमार में सुधार के कार्यो का समर्थन करने से लेकर पूर्व के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने और जापान के साथ मिलकर तृपक्षीय सहयोग के जरिए समुद्री सीमा की सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की भारत की नीतियों का स्वागत करते हैं।”
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी रणनीति का वर्णन करते हुए डोनिलॉन ने कहा, “विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ अमेरिका के संबंध को ओबामा इक्कीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी के रूप में देखते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 2009 में अमेरिका यात्रा तथा 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बीच अमेरिका ने हर मौके पर स्पष्ट किया है कि वह भारत की तरक्की को सिर्फ स्वीकार ही नहीं करता, बल्कि दिल से उसका समर्थन करता है।”
डोनिलॉन का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना संतुलन बनाने में लगा है, क्योंकि आने वाली सदी में इस क्षेत्र की तरक्की तथा अमेरिका की सुरक्षा एवं समृद्धि इसी पर निर्भर है। हालांकि संतुलन बनाने का अर्थ, अन्य क्षेत्रों के महत्वपूर्ण साझेदारों से सम्बंध समाप्त करना, चीन पर नकेल कसना, या एशिया पर शर्तें थोपना नहीं है।




