पप्पू की हत्या काफी सुनियोजित साजिश के तहत की गयी. यही कारण है कि उसकी हत्या कहीं और की गयी, शव को कहीं और फेंका गया और उसकी फोर्ड फिगो गाड़ी को कहीं और ठिकाने लगा दिया गया. अनुसंधान की दिशा को बदलने के लिए शातिरों ने कार में एक साथ चार चिट्ठियां रख दी थी. चिट्ठी में लिखे मजमून भी स्पष्ट नहीं है कि अपराधी पप्पू की हत्या क्यों करना चाहते थे. चिट्ठी में एक जगह किसी दिनेश राय की चर्चा की गयी है. यह दिनेश राय कौन है, इसके बारे में पुलिस पता लगा रही है. हालांकि पुलिस ने पप्पू के कई परिजनों से दिनेश राय के बारे में पूछताछ की तो किसी ने स्पष्ट जानकारी होने से इनकार कर दिया. हत्यारों की तलाश में पुलिस की एक टीम गोपालगंज भी गयी थी. गोपालगंज पप्पू की पैतृक घर है. वहां भी उसने कई व्यवसायों में लाखों रुपये निवेश कर रखा था.
कई लोगों को सूद पर रुपये भी दिये थे. पप्पू की कार बरामद होने के बाद पुलिस को लग रहा है कि उसकी हत्या में काफी नजदीकी लोग ही शामिल रहे होंगे. यही कारण है कि पप्पू को आगे वाली सीट पर बैठा दिया गया और अपराधी पीछे वाली सीट पर बैठे. कार जब चल रही थी, इसी बीच पीछे बैठे एक अपराधी ने उसकी कनपटी में सटा कर एक गोली मार दी. पप्पू के नौकर बबलू को भी एक ही गोली कनपटी के पास मारी गयी थी. पुलिस का मानना है कि अपराधी पहले नौकर की हत्या घर में कर दी.
उसके बाद पप्पू को चलती कार में उसकी हत्या कर दी और शव को दीघा नहर के समीप पोखर में फेंक दिया. सोमवार की रात करीब दस बजे अपराधी उसे अपने साथ ले गये थे. घंटे भर के अंदर पप्पू का काम तमाम करने के बाद अपराधी कार आरपीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के समीप लावारिस हालत में लगा दिया और वहां से फरार हो गये.




