
Ranchi : चारा घोटाला मामले में दोषी करार बिहार के पूर्व मुख्य्मंत्री लालू प्रसाद यादव को लेकर झारखंड के मंत्री सरयू राय नरम पड़ गये हैं. रांची की विशेष अदालत की अगली सुनवाई में लालू प्रसाद यादव को सजा सुनाई जायेगी. इस पर मंत्री सरयू राय ने कहा है कि यह न्यायालय के उपर है कि उन्हें कितनी सजा मिलेगी. ऐसे मामले में जो दोषी करार दिए गए हैं उनके लिए न्यूनतम या अधिकतम सजा तय है. ये न्यायालय पर निर्भर करता है कि किसे कितनी सजा मिलेगी.
चारा घोटाले के पर्दाफाश करने का मकसद यह नहीं था कि लालू को जेल हो जाये
सरयू राय ने कहा है कि पशुपालन घोटाला का पर्दाफाश करने का मेरा ये मकसद कतई नहीं था कि लालू यादव को सजा हो जाये. हमलोग ये चाहते थे कि सारी चीजों में सुधार हो. चीजें ठीक हो जाए. कहा, दरअसल साल 1990 से 1994 तक लालू प्रसाद यादव के पास काफी जनसमर्थन था. उस जनसमर्थन के कारण उनके मन में अभिमान जैसी चीज आ गयी थी. सही चीजों के देखते-समझते नहीं थे. उन्हें लगता था कि वो जो भी कर रहे हैं वो सही है. सब उनकी बात मानें. उस समय विधायिका और कार्यपालिका बिल्कुल ही पंगु हो गयी थी. कैग जैसी भारत सरकार की संस्थाएं सही दिशा में काम नहीं कर पा रही थी. न्यायपालिका को भी गुमराह करने की कोशिश हर स्तर पर हो रही थी. इसलिए पूरा सिस्टम फेल हो गया था और सिस्टम फेल होता है तो ऐसी चीजें होती है.
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मैंने उस वक्त भी चेतावनी दी थी
सरयू राय ने कहा कि मैंने उस वक्त भी चेतावनी दी थी. कहा था व्यक्ति सिस्टम बना सकता है, लेकिन व्यक्ति सिस्टम का विकल्प नहीं हो सकता है. इसलिए सबको इस बात का ध्यान रखना चाहिए. मगर मनुष्य हैं तो मनुष्य का मनोविज्ञान है, जब पावर मिल जाता है, जब ताकत मिल जाती है तो लोगों के मन में कई तरह की बातें आ जाती हैं. उन्होंने कहा कि लालू जी जिंदगी भर जेल में रहेंगे. अभी और मुकदमे हैं. लेकिन, इससे हमलोगों को क्या मिलने वाला है. इसी कारण से सिस्टम में बैठे लोग सुधर जाएं. सिस्टम की परवाह करें. इस पूरे प्रकरण की यही उपलब्धि रहेगी.
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