नई दिल्ली:भ्रष्टाचार और काला धन के मुद्दों पर अन्ना टीम और बाबा रामदेव के एक साथ आने की कोशिश में दम नहीं लगता। सांकेतिक अनशन के एक दिन बाद ही टीम अन्ना और बाबा रामदेव, दोनों ही अलग-अलग रास्ते पर जाते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर तो बाबा रामदेव राजनीतिक दलों से मिलकर अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं तो अन्ना हजारे ने टीम के साथ एक बार फिर वापसी करते हुए प्रधानमंत्री पर सीधा हमला किया है। यह तब हुआ जब रामदेव पहले ही कह चुके हैं कि व्यक्तिगत तौर पर किसी का नाम लेना सही नहीं।
सोमवार को टीम अन्ना ने लगातार 8 घंटे तक गंभीर बैठक की तो योग गुरु रामदेव राजनीतिक दलों से संपर्क साधते दिखाई दिए। रामदेव ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी से मुलाकात कर काले धन के खिलाफ आंदोलन में समर्थन मांगा। मुलाकात के बाद बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर पार्टी का रामदेव को पूरा समर्थन है। बीजेपी अध्यक्ष गडकरी इसे राजनीतिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन की संज्ञा दे बैठे।
रामदेव लालू यादव, मुलायम सिंह, सोनिया गांधी, एबी वर्धन और शरद यादव से भी मुलाकात के प्रयास में हैं। योग गुरु ने कहा कि वे सोनिया गांधी को मुलाकात के संबंध में पत्र लिख चुके हैं। साथ ही अपने आंदोलन के लिए मैं सभी राजनीतिक दलों से मुलाकात करूंगा।
एक टीवी चैनल को दिये गए इंटरव्यू में रामदेव ने दोहराया कि किसी का नाम लेना सही नहीं है। किसी व्यक्ति का नाम लेने से काला धन आंदोलन और मजबूत लोकपाल जैसे मुद्दों के रास्ते में मुश्किल पैदा होगी।
रामदेव नेताओं के नाम न लेने की बात पर अड़े हुए हैं तो टीम अन्ना ने कोर ग्रुप की मीटिंग में फैसला किया कि वो अपनी बात पर कायम रहेंगे। मीटिंग के बाद अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर सीधा हमला किया अन्ना हजारे ने कहा कि पहले तो वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ईमानदार मानते थे और खुलकर ये कहते भी थे, लेकिन कोयला आवंटन से जुड़े दस्तावेजों को देखने के बाद वो मामले में पीएम की भागीदारी को लेकर संशय में हैं।
मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर टीम अन्ना 25 जुलाई से एक और अनशन करने की तैयारी कर रही है। लेकिन रामदेव इस अनशन में बुलाए जाएंगे या नहीं यह अभी तक साफ नहीं है।




