नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि टीम अन्ना के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग वाली एक याचिका पर तीन महीने के भीतर विचार करे। याचिका में टीम अन्ना पर अवैध रूप से विदेश से धन लेने का आरोप लगाया गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता एएस चांडियोक से उस याचिका पर विचार करने के लिए कहा जिसे वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर किया है। खंडपीठ ने कहा कि वह सरकार के प्रतिनिधि के रूप में याचिका पर सुनवाई की स्वीकृति दें, ताकि इस मामले का निपटारा तीन महीने के भीतर हो सके।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीम अन्ना के सदस्यों ने जन लोकपाल आंदोलन चलाने के लिए विदेशी योगदान (नियामक) अधिनियम (एफसीआरए) का उल्लंघन कर विदेश से धन लिया था। अदालत ने याचिकाकर्ता शर्मा को भी निर्देश दिया कि वह अपनी याचिका की एक प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय में पेश करें।
शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि एफसीआरए के प्रावधान के तहत गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के सदस्यों को किसी विदेशी कंपनी या संगठन से धन लेने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन टीम अन्ना ने अनुमति नहीं ली।
याचिकाकर्ता ने उन विदेशी कंपनियों और संगठनों की सूची पेश की है जिनसे टीम अन्ना ने कथित तौर पर धन लिया। याचिका में कहा गया है कि अदालत को विदेशी धन से चलाए गए आंदोलन को अवैध, असंवैधानिक घोषित करते हुए शायद प्रसन्नता होगी।




