राँची (झारखंड): – केन्द्रीय बजट पर मुख्यमंत्री, अर्जुन मुण्डा की प्रतिक्रिया –
केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज जो यूनियन बजट संसद के पटल पर रखा गया वह राष्ट्र के समक्ष खड़ी चुनौतियों से जुझने में सर्वथा असफल एवं दिशाहीन सिद्ध होगा। समावेषी विकास, निजी निवेष, बेहतर डिलीवरी मेकनिज्म, कुपोषण एवं गर्वनेंस की जो बात बजट की मूल अवधारणा में कही गयी है, वह कहीं से भी परिलक्षित नहीं होती है।
रेवेन्यू डिफीसीट और फिसकल डिफीसीट का उत्तरोत्तर बढ़ना, महँगाई पर नियंत्रण का कोई ठोस कदम नहीं होना, आधी आबादी अर्थात् युवाषक्ति एवं महिलाशक्ति के समावेशी विकास अर्थात् शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के कार्यक्रमों की रूपरेखा स्पष्ट नही होने सहित संभावित आर्थिक समस्याओं से जुझने का कोई विकल्प बजट में दिखाई नहीं देता। 14.90 लाख करोड़ के बजट में गैर-योजना और योजना का बेहतर समन्वय नही दिखता। आज कई ऐसे क्षेत्र हैं, यथा-ग्रामीण एवं शहरी रोजगार, उद्यमिता विकास अर्थात् लाईवलीहुड मिशन जो बेहतर मानव संसाधन के दृष्टिकोण से अधिक महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार आंतरिक एवं बाह्नय सुरक्षा, जल प्रबंधन, ढ़ांचागत निवेश तथा वैश्विक बाजार के अनुरूप देश को मात्र उपभोक्ता नहीं बल्कि उत्पादक बनाने की दिशा में प्रयास जरूरी है परंतु यह बजट हमें निराश करता है।
झारखण्ड जैसे राज्य, जिसकी मौलिक समस्याओं को मैनें समय-समय पर पुरजोर ढ़ंग से केन्द्र के समक्ष रखा है, को नजरअंदाज किया गया है। क्षेत्रीय संतुलित विकास, गरीबी और अन्य मानकों के आधार पर राज्य को मिलने वाली सहायता खनिज, लोक-उपक्रमों से संबंधित प्रश्न आदि के निदान का भी संकेत इस बजट में नहीं है। हाँ, इतना अवश्य है कि ओस की बूदों की तरह छिट-पुट राहत की चर्चा अवश्य की गई है।




