
Bhopal. राजस्थान में जारी सियासी संग्राम का असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल सकता है. सचिन पायलट को डिप्टी सीएम और राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने का असर ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल में भी दिखाई देगा. मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस राजस्थान की सियासी लड़ाई को गुर्जर वोट से जोड़कर देख रही हैं. मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल में गुर्जर वोटों की संख्या कई विधानसभा सीटों को प्रभावित करती है.
14 सीटों पर असर
ग्वालियर-चंबल की 14 सीटों पर गुर्जर वोटों का प्रभाव है. कांग्रेस में रहते हुए सचिन पायलट गुर्जर वोटरों को साधने के लिए इन विधानसभा सीटों पर दौरा करते थे, लेकिन अब कांग्रेस में जारी कलह को भाजपा अपने फायदे से जोड़कर देख रही है. राजस्थान की सरहद से लगे मध्यप्रदेश के इस अंचल में सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट की भी अच्छी पकड़ थी. बता दें कि माधवराव सिंधिया और राजेश पायलट अच्छे दोस्त भी थे.
भाजपा को उम्मीदसचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अच्छी दोस्ती है. सचिन पायलट जहां कांग्रेस के खिलाफ झंडा बुलंद कर रहे हैं वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में शामिल हो गए हैं. कहा जा रहा है कि सिंधिया ने पायलट को भाजपा में शामिल करने के प्रयास भी किए हैं. ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि उपचुनाव में गुर्जर वोट भाजपा के पक्ष में आ सकते हैं. वहीं, कांग्रेस को गुर्जर वोटों का नुकसान भी हो सकता है. 2018 में इस अंचल पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस के हाथों से गुर्जर वोट बैंक छिटक सकता है. पहले तो सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए अब गुर्जर वोटों को लेकर कांग्रेस संशय की स्थिति में है.
मध्यप्रदेश की 26 सीटों पर होने हैं उपचुनाव
ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद मध्यप्रदेश में 22 सीटें खाली हुई थीं. हाल ही में दो विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं जबकि दो सीटें विधायकों के निधन के कारण खाली हैं. मध्यप्रदेश की कुल 26 सीटों पर उपचुनाव होने हैं.




