
New Delhi : पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के पहले ही केंद्रीय सतर्कता आयोग सीवीसी ने जूलरी सेक्टर में अनियमितता को लेकर खतरे का संकेत दिया था. सीवीसी ने की सलाह अगर पीएनबी के द्वारा गंभीरता से लिया जाता तो देश को 13 हजार 600 करोड़ रुपये के घोटाले का सामना नहीं करना पड़ता. गौरतलब है कि पीएनबी घोटाने ने देश के बैंकिंग सिस्टम को हिला कर रख दिया था.
जूलरी फर्मों के अकाउंट्स में हो रही अनियमितता को लेकर की गयी थी चर्चा
सीवीसी के 2017 के वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक उसने पांच जनवरी 2017 को ही सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय के सीनियर अधिकारियों, पीएनबी समेत 10 बैंकों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों के साथ बैठक की थी. साथ ही उनके साथ जूलरी फर्मों के अकाउंट्स में हो रही गंभीर अनियमितता की चर्चा भी की थी. यब बैठक विनसम ग्रुप के जतिन मेहता के द्वारा बैंकों के साथ हुए फ्रॉड को लेकर की गयी थी. बैठक में जूलरी फर्म में फ्रॉड, बैंकिंग सिस्टम में गड़बड़ी, सीवीओ की पूछताछ, खरीददारों के अकाउंट्स और सोने के इंपोर्ट पर चर्चा की गयी थी.
बैंक सतर्क रहती तो मेहुल और नीरव पर कजा जा सकता था शिकंजा
सूत्रों के मुताबिक जिस वक्त यह बैठक की गयी थी उस वक्त नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के द्वारा की गयी घोटाले की बात सामने नहीं आयी थी. लेकिन घोटाले के बाद यह कहा गयी कि अगर खतरे का संकेत मिलते ही बैंकों के द्वारा सतर्कता बरती जाती और इस सेक्टर से जुड़े लोगों के खातों को पीएनबी जांच करता तो घोटाले को रोका जा सकता था. अगर बैंक इसे लेकर सतर्क रहती तो नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर शिकंजा कसा जा सकता था.
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280 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हैं नीरव
इसमें कहा गया है कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 10 (3) (सी) के तहत उन्हें यह जवाब देने के लिए एक हफ्ते का वक्त दिया गया है कि उनका पासपोर्ट जब्त या रद्द क्यों नहीं किया जाये. सीबीआई और ईडी ने गुरुवार को विदेश मंत्रालय में अलग-अलग आवेदन भेजकर मांग की थी कि नीरव मोदी और उसके मामा तथा उसके कारोबारी साझेदार मेहुल चोकसी का पासपोर्ट रद्द किया जाये. चोकसी गीतांजलि जूलरी चेन का प्रमोटर है. दोनों 280 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हैं. गौरतलब है कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने पीएनबी की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रान्च के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया था. फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए पैसों की निकासी की गई.
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