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बजट देश को उच्च आर्थिक वृद्धि दर के रास्ते पर लाने की रूपरेखा पेश करता है : जेटली

New Delhi : पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शनिवार को कहा कि 2019-20 का बजट उच्च आर्थिक वृद्धि दर के रास्ते पर देश के लौटने को लेकर रूपरेखा पेश करता है.

उन्होंने कहा कि बजट इस बात पर आधारित है कि जो अर्थव्यवस्थाएं सूझबूझ वाली राजकोषीय नीतियों का अनुकरण करती हैं, वो राजकोषीय मोर्चे पर लापरवाही करने वालों की तुलना में अंतत: पुरस्कृत होती हैं.

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पीएम का पहला कार्यकाल अर्थशास्त्र व अच्छी राजनीति का गवाह 

बजट पेश होने के एक दिन बाद जेटली ने कहा कि एक बुनियादी सवाल हमेशा पूछा जाता रहा है कि अच्छा अर्थशास्त्र और चतुर राजनीति के बीच क्या चुना जाना चाहिए.

‘द बजट 2019-20’ शीर्षक से अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह विकल्प अनुचित है क्योंकि किसी भी सरकार को बने रहने और प्रदर्शन के लिये दोनों की आवश्यकता होती है. प्रधानमंत्री का पहला कार्यकाल बेहतर अर्थशास्त्र और अच्छी राजनीति के मिश्रण का गवाह रहा है.

जेटली ने कहा कि बजट विकास की आकांक्षा रखने वाले भारत के लिये राजनीतिक दिशा सृजित करता है. मध्यम वर्ग और नव-मध्यम वर्ग के हितों से जुड़े कई चीजों को प्रोत्साहन दिया गया है. इसमें सस्ता मकान अैर इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं.

इसके अलावा रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने के लिये बुनियादी ढांचा, निर्माण और रीयल इस्टेट क्षेत्र को भी गति देने के उपाय किये गये हैं.

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चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान

जेटली ने कहा कि भारत दुनिया में तीव्र आर्थिक वृद्धि वाला बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. पिछली दो-तीन तिमाहियों में वृद्धि नरम हुर्ह है. निश्चित रूप से बजट एक नीति दस्तावेज के रूप में आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर भारत को पटरी पर लाने को लेकर रूपरेखा को रखता है.

उल्लेखनीय है कि भारत की आर्थिक वृद्धि जनवरी-मार्च तिमाही में घटकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत रही. पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में भी आर्थिक वृद्धि दर भी पांच साल के न्यूनतम स्तर 6.8 प्रतिशत रही. आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है.

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