कायस्थ महासभा ने आर्थिक आरक्षण की मांग को लेकर डीसी को सौंपा ज्ञापन
Chatra : अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के शिष्टमंडल ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह से भेंटकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा. शिष्टमंडल का नेतृत्व जिला अध्यक्ष राजेश कुमार कर रहे थे. संघ के जिला सचिव मनमीत सिन्हा ने कहा कि पूरे देश में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के द्वारा उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर आर्थिक आरक्षण की मांग की जा रही है. कहा कि अखिल भारतीय कायस्थ महासभा को किसी जाति वर्ग से कोई विरोध नहीं है. जिन्हें उपलब्धियां मिल रही हैं, उनसे कोई ईर्ष्या भी नहीं है. हमें तो चिंता समग्र राष्ट्र की है, क्योंकि एक शक्ति संपन्न और समृद्ध राष्ट्र की नींव में प्रतिभा भरी होती है. आरक्षण के कुत्सित प्रहार से राष्ट्र के नींव पर आघात से कायस्थ समाज दुःखी हो रहा है.
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान निर्माताओं ने समाज में समानता लाने के लिए 10 दस वर्षों के लिए आरक्षण का प्रावधान लाया था. जिसमें क्रमशः अनुसूचि जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 15% और 7.5% का आरक्षण दिया गया था, पुनः 1953 में काका कालेलकर की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग का सृजन कर आरक्षण में शामिल कर दिया गया.
राजनीतिक पार्टियां आरक्षण के मुद्दे को वोट बैंक बनाकर राजनीति कर रही हैं
कहा कि आजादी के 70-71 वर्षों के बाद भी आरक्षण समाप्त नहीं हो सका. सभी राजनीतिक पार्टियां आरक्षण के मुद्दे को वोट बैंक बनाकर राजनीति कर रही हैं, जिसका परिणाम है कि वर्तमान में एससी-एसटी, ओबीसी का एक वर्ग काफी सुखी संपन्न हो गया. वहीं दूसरा वर्ग काफी पीछे रह गया. वर्तमान में आरक्षण का लाभ भी उन्हीं सुखी संपन्न वर्ग के लोगों को मिल रहा है. ऐसे में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आरक्षण की मांग कर रही है. ताकि आर्थिक रुप से पिछड़े एससी-एसटी, ओबीसी के साथ साथ आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को भी समाज में समानता लाने के लिए आर्थिक आरक्षण पर विचार करनी चाहिए. बदलते समय में जातिगत आरक्षण देश के लिए अभिशाप साबित हो रहा है. मौके पर पंकज सिन्हा, राकेश सिन्हा उर्फ रवि, मनोज प्रधान, अजित सिन्हा, अंकज सिन्हा, अनुज प्रधान सहित अन्य चित्रांश उपस्थित थे




