
New Delhi: आरएसएस प्रमुख के सेना पर किये टिप्पणी का हर ओर विरोध हो रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो ट्वीट कर इसे हर भारतीय का अपमान करार दिया है और कहा है कि आरएसएस इसके लिए पूरे देश के समक्ष माफी मांगे. वहीं आरएसएसएस का कहना है कि मोहन भागवत के भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों की तुलना सेना से नहीं की थी और उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. वहीं भागवत के बयान के बारे में पूछे जाने पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में सोशल मीडिया से सुना है. पूरी जानकारी के बाद ही कुछ बोलेंगे.
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गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया मोहन भागवत का बयान
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य कहा कि मोहन भागवत के बिहार स्थित मुजफ्फरपुर में दिये गये वक्तव्य को, गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने कहा कि भागवत जी ने कहा था कि परिस्थिति आने पर तथा संविधान द्वारा मान्य होने पर भारतीय सेना को सामान्य समाज को तैयार करने के लिये छह महीने का समय लगेगा, तो संघ के स्वयंसेवकों को भारतीय सेना 3 दिन में तैयार कर सकेगी. इसका कारण यह है कि स्वयंसेवकों को अनुशासन का अभ्यास रहता है.
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सामान्य समाज और स्वयंसेवकों के बीच में थी तुलना, सेना के साथ नहीं
वैद्य ने कहा, यह सेना के साथ तुलना नहीं थी, पर सामान्य समाज और स्वयंसेवकों के बीच में थी. दोनों को भारतीय सेना को ही तैयार करना होगा. अगरतला में भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि भागवत ने संगठन की तत्परता को रेखांकित करने के लिये कोई बयान दिया होगा. आरएसएस के स्वयंसेवक होने के कारण वे जानते हैं कि सेना के बलिदान एवं पराक्रम के प्रति संगठन के मन में अपार आदर का भाव है.
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