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जहां भूमि अधिग्रहण करेगी सरकार,  वहां एसआईए और इआईए समेत जमीन रक्षा संबंधी कानून हो जायेंगे फ्रीज

Pravin Kumar/Gaurav

Ranchi  :  भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार (झारखण्ड संशोधन) विधेयक, 2017 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म होने लगा है. एक ओर जहां विपक्षी दल सरकार के विरोध में आंदोलन की बात कह रहे हैं,  वहीं आम जनों में भी कानून को लेकर कई विचार समाने आ रहे है. वहीं कानून बनाने के पूर्व टीएसी में प्रस्ताव लाया गया था या नहीं. एक बड़ा सवाल है. क्या भूमि अधिग्रहण कानून 2017  लागू होने के बाद जमीन रक्षा सबंधी कानून और संवैधानिक प्रावधान किस रूप में मौजूद रहेगा,  एक बड़ा प्रश्न है.  इन विषय पर टीएसी सदस्य रतन तिर्की और लक्ष्मण टुडू से न्यूज विंग वरीय संवादादता ने बात की. यहां प्रस्‍़तुत है बातचीत के मुख्य अंश :

झारखंडी जनमानस जमीन संबंधी विषय पर काफी संजीदा है : रतन तिर्की

टीएसी सदस्‍़य रतन तिर्की ने कहा कि झारखंडी जनमानस जमीन संबंधी विषय पर काफी संजीदा है.  खासकर आदिवासी समाज के बीच भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो स्वाभाविक आक्रोश जनमानस के बीच उभरता है.  झारखंड के गांवों के लोग आज भी अपनी परंपरागत व्यवस्था को जानते हैं, समझते हैं. वे अच्छी तरह से इस कानून को समझते हैं और यह सभी को जानना चाहिए, सरकार को भी जानना चाहिए, प्रशासनिक अधिकारियों को भी जानना चाहिए. गांव का जो व्यक्ति है उसका अन्‍़योनाश्रय संबंध जमीन से है.  जमीन के बिना वह रह नहीं सकता, वह परंपरागत विरासत के साथ जीना चाहता है. अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाकर जीना चाहता है. गांव के नियम कानून के साथ वह रहता आया है और उसी के साथ रहता रहेगा. वर्तमान में जो राष्ट्रपति महोदय ने भूमि अधिग्रहण् बिल को पास किया. इस पर जनजातीय परामर्श दातृृ परिषद में चर्चा की गयी थी. इसमें सभी सदस्यों ने कहा कि जमीन विकास के लिए देनी चाहिए, लेकिन अधिग्रहण के लिए कानून बने हैं, उसका भी पालन होना चाहिए. 

सोशल इंपैक्ट असेसमेंट और इन्वायरमेंटल इंपैक्ट एसेसमेंट का पालन होना जरूरी

 2008 में कानून, भूमि स्थापन और पुर्नवास नीति बनी है उसमें स्पष्ट है कि सोशल इंपैक्ट असेसमेंट और इन्वायरमेंटल इंपैक्ट एसेसमेंट का पालन होना जरूरी है. अधिग्रहण से पूर्व टीएसी की बैठक में 2013 का कानून का जिक्र हुआ और पेशा के तहत जमीन लेने की बात कही गयी. लेकिन सवाल यह है कि आखिर जो प्रस्ताव सरकार ने राष्ट्रपति के पास भेजा उसमें एसआईए और इआईए का जिक्र हुआ ही नहीं था,  उसे कैसे कानून से अलग कर दिया गया है. कानून को लेकर संविधान विशेषज्ञों का भी मानना है कि भूमि अधिग्रहण कानून में एसआईए और इआईए एवं ग्रामसभा का महत्व न होना गलत है. आज हम  विकास की अंधी दौड़ में आगे बढ़ रहे है. यह गलतियां जानबूझकर हुईं या इसे इग्नोर किया गया अब तक यह स्पष्ट नही हो सका है और यही आमजनो के आक्रोश  का सबसे बड़ा कारण है. राज्य में अभी तक पेशा कानून को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया,  जबकि ग्रामीण जनमानस के बीच अपने अधिकारों को पाने की जिद है.

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पेशा कानून के तहत ग्रामसभा को उसका पूर्ण अधिकार दिया गया है

वहीं पेशा कानून के तहत ग्रामसभा को उसका पूर्ण अधिकार दिया गया है, पर इसका राज्य में पालन नहीं किया जा रहा. जबकि इसका पालन कराने का दायित्व  सरकार, कानूनविदों, प्रशासनिक पदाधिकारियों और आम जनों को भी है. भूमि अधिग्रहण बिल के आ जाने के बाद ऐसा नहीं है. जिन परियोजना के लिए सरकार भूमि अधिग्रहण करेगी वहां पर सीएनटी, एसपीटी के साथ पेशा कानून फ्रीज हो जायेगा, लेकिन कानून अन्य क्षेत्र में प्रभावी ही रहेगा. रतन तिर्की के अनुसार अब तक के सभी महामहिम और राज्य सरकार ने पांचवीं अनुसूची उल्लंघन किया है. कहा कि झारखंड गठन के 18 साल हो गये, लेकिन संवैधानिक कानूनों को समझने और लागू करने का प्रयास झारखंड में नहीं हुआ है,  जिनको पांचवीं अनुसूची लागू करनी है वह इसे समझकर लागू नहीं कर रहे हैं. अब तक राज्य में  जितनी भी सरकारें आयी हैं, जितने भी राज्यपाल आये हैं, सभी ने पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन किया है.

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कानून जनता के हित में, राज्य के विकास में अब जमीन बाधा नहीं -लक्ष्मण टुडू       hhhh

क्या कहते हैं टीएसी सदस्य सह घाटशिला विधायक लक्ष्मण टुडू ने कहा कि यह कानून राज्य की जनता के हित में है. सरकारी योजनाओं के लिए अब जमीन की कमी नहीं होगी. राज्य की विकास संबंधी योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करने में पहले विलंब होता था. इस कानून के लागू हो जाने के बाद सरकारी योजनाओं के लिए जो राज्य और राज्य की जनता के हित में है, उसे पूरा होने में अब विलंब नहीं होगा. हालांकि लक्ष्मण टुडू  ने सोशल इंपेक्ट एसेसमेंट और इनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट अधिग्रहण से पूर्व नहीं करने के सवाल पर कुछ नहीं कहा, जबकि किसी भी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण करने से पहले अब तक सोशल इंपैक्ट असेसमेंट और इनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट करना आवश्यक था.

तीन अगस्त 2017 के टीएसी की बैठक में किसने क्या कहा था

भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के पूर्व तीन अगस्त 2017 की टीएसी की बैठक में इस विषय पर चर्चा की गयी थी, जेबी तुबिद ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम धारा 49 के सरलीकरण का प्रस्ताव के बदले भू अर्जन अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर विकास कार्य के लिए जमीन प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा था. जिसे ताला मरांडी, शिवशंकर उरांव, सुखदेव भगत,  गंगोत्री कुजूर, विमला प्रधान ने सहमति व्यक्त थी. इसी बैठक में अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार ने परामर्श दिया था कि भूमि सुधार विषय संविधान की समवर्ती सूची में होने के कारण राज्य सरकार इस पर अलग कानून बना सकती है,  जिस पर राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त करनी होती है.

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