
Akshay Kumar Jha
Ranchi : यह कहानी उस देश की है, जहां स्किल इंडिया की बात परवान पर है. उस राज्य की कहानी है, जहां कौशल विकास कराने के बाद 25,000 युवाओं को नौकरी देने का ढिंढोरा लाखों की भीड़ के बीच पीटा जाता है. भले ही 25,000 युवाओं में से 20,000 युवाओं का पता ही गलत निकलता हो. बात हो रही है झारखंड के बगोदर, गिरिडीह और बोकारो के ऐसे युवाओं की जो रोजी-रोटी के लिए अपना देश छोड़ विदेश गये, और वहां जा कर भूखे दिन गुजार रहे हैं. उनकी सुध ना ही सरकार ले रही है और ना ही जिसके भरोसे वो मलेशिया गये थे वो. दिन-ब-दिन उनकी हालत बद-से-बदतर हो रही है. वो लगातार अपनी वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि पता नहीं कब उनकी कोई सुन ले, और वो अपने वतन सही-सलामत लौट आये. इधर इनके घरवालों की हालत भी दयनीय होती जा रही है. एक तरफ घर का कमाने वाला विदेश में मदद की टकटकी लगाये हुए है, दूसरी तरफ घरवाले चूल्हे की ओर टकटकी लगाये हुए हैं, कि ना जाने कब इससे धुएं की खुशबू निकले.
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सवाल कि आखिर इन्हें देश से बाहर जाने कैसे दिया गया
पेट की आग किसी भी इंसान से कुछ भी करा सकती है. लेकिन लाख टके का सवाल है कि आखिर कैसे कानून को ताक पर रख कर इन्हें देश से बाहर जाने दिया जाता है. झारखंड के सभी नौ युवा टुअरिस्ट या कहें विजिटिंग विजा पर मलेशिया गये. यह सभी युवा एक गरीब घर के हैं. इन्हें देख कर ही साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी हैसियत नहीं कि वो घूमने के लिए मलेशिया जायें. ऐसे में सवाल उठता है कि इमिग्रेशन आउट करते वक्त कैसे अधिकारी इन्हें इंडिया से बाहर जाने की परमीशन देते हैं.
चेन्नई की बाला जी कंपनी ने दिया था रोजगार का भरोसा
यह सारा काम चेन्नई की एक कंपनी बाला जी का है. कंपनी अकसर ऐसे युवाओं को तलाशती है जो स्किल्ड हों. उन्हें मोटी रकम का भरोसा दिला कर विजिटिंग यानि टूअररिस्ट वीजा पर विदेश भेज देते हैं. विदेश जाते ही इन्हें काम पर लगा दिया जाता है. इनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं. बाद में कई तरह से इन्हें ब्लैकमेल किया जाता है. एक लंबी प्रक्रिया के बाद इन्हें वर्किंग वीजा दी जाती है. जिसके बाद ही ये स्थायी रूप से विदेशों में काम करने के लायक होते हैं. जो किसी भी देश के कानून के खिलाफ है. ऐसे में बाला जी जैसी कंपनी पर लगाम लगाने की जरूरत है.
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सैलेरी की बात पर भी धोखा
ट्रांसमिशन का काम करने वाली लीड मास्टर इंजीनियरिंग नाम की कंपनी में इन सभी युवाओं को रोजगार मिला. देश से जाते वक्त इन्हें बताया गया कि जो स्क्लिड हैं उन्हें 1800 रिंगिट (मलेशियायी करेंसी) भारत के रुपए के मुताबिक करीब 30,000 रुपए दिये जायेंगे. खाना और रहने का इंतजाम अलग से. ऐसे युवा जो स्क्लिड नहीं हैं उन्हें 1400 रिंगिट भारतीय रुपये के मुताबिक करीब 24,000 रुपए दिये जाने का भरोसा दिया गया था. लेकिन वहां पहुंचने के बाद कहा गया कि स्किलड को 1200 रिंगिट (करीब 20,000 रुपये) और अनस्क्लिड को 700 रिंगिट (करीब 12,000) रुपये ही मिलेंगे.
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11 महीने में दी गयी सिर्फ आठ महीने की सैलेरी
युवाओं ने जब काम करना शुरू किया तो लगातार आठ महीने की सैलेरी के बाद उन्हें नौवे महीने से सैलेरी मिलनी बंद हो गयी. उन्होंने जब कहा कि हमारे पैसे दे दो हम वापस जायेंगे, तो पासपोर्ट वापस नहीं करने की धमकी दी गयी. बताते चलें कि काम पर लगने से पहले ही कंपनी सभी से उनके पासपोर्ट अपने पास जब्त करा लेती है. ऐसे में जब उन्होंने विरोध करना शुरू किया तो उन्हें काम से निकाल दिया गया. किसी तरह बगोदर के विकास नाम के एक शख्स की मदद के बाद वो मलेशिया एम्बेसी पहुंचे. जहां कई दिनों से वो वतन लौटने की राह तक रहे हैं. लेकिन उनकी सुध अब तक किसी ने नहीं ली है.
कंपनी के एमडी ने कहा पासपोर्ट लेना है तो लो सैलेरी नहीं मिलेगी
इधर पैसे की चाह में बेवतन हुए युवाओं को लीड मास्टर इंजीनियरिंग के एमडी कुमार एनयप्पा ने कई तरह से ठगा. पहले तो तय सैलेरी से मुकरा. फिर पूरी सैलेरी देने से मुकरा. अब तो कह रहा है कि सैलेरी देगा ही नहीं. पासपोर्ट लेना है तो ले लो. दूसरी तरफ लाख कोशिश करने के बाद भी एमडी कुमार एनयप्पा युवाओं की मदद करने वाले विकास से मिलने से भी कतरा रहा है.
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पंकज पांडे के जरिये पहुंचायी न्यूज विंग तक फरियाद
बोकारो गोमिया निवासी पंकज पांडे से किसी तरह से बगोदर के विकास ने संपर्क किया. उन्हें सारी डिटेल भेजी और मदद की गुहार लगायी. पंकज पांडे ने मलेशिया में फंसे युवाओं से न्यूज विंग की बात करायी. वो इस उम्मीद में हैं कि मीडिया में बात आने के बाद उनकी सुनी जायेगी. देखने वाली बात होगी कि आखिर कब उन्हें वापस अपने वतन लौटने का मौका मिलता है. न्यूज विंग भी भारत और झारखंड सरकार से उन युवाओं की मदद करने का अनुरोध करता है.
झारखंड के श्रम आयुक्त से मिला आश्वासन
इस बारे में न्यूज विंग से खास बातचीत में झारखंड के श्रम आयुक्त उमाशंकर सिंह ने कहा कि न्यूज विंग की ओर से यह बात मेरे संज्ञान में आयी है और मेरे पास इससे संबंधित आवेदन जैसे ही आता है. तो मैं इसपर तुरंत गृह विभाग से पत्राचार करूंगा. साथ ही उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला विदेश से जुड़ा है तो ऐसे में गृहविभाग की भूमिका अहम है. इसलिए मेरी पूरी कोशिश होगी कि जल्द-जल्द युवाओं को भारत लाया जाये.
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