
NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले से संबंधित मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं और इसकी जांच कर रहा कोई भी जांच अधिकारी किसी भी तरह के संदेह के घेरे में नहीं रहना चाहिए. न्यायालय ने एयरसेल – मैक्सिस सौदे की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. न्यामयूर्ति अरूण कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि एयरसेल – मैक्सिस सौदे की जांच कर रहे निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह के खिलाफ लगाये गये आरोप गंभीर हैं और इन पर गौर करने की आवश्यकता है. केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने न्यायलय से कहा कि सरकार इन आरोपों की जांच के लिए तैयार है कि सिंह ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है.
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आरोप चाहे सही हों या गलत, इन पर गौर करना ही होगा
उन्होंने इसके साथ ही सीलबंद लिफाफे में एक पत्र भी पीठ को सौंपा. पीठ ने सीलबंद लिफाफे में सौंपे गये दस्तावेज का अवलोकन करने के बाद कहा कि इस मामले में संवदेनशील मुद्दे शामिल हैं. पीठ ने कहा, वास्तविकता के अनुसार , यदि आपके (सिंह) खिलाफ आरोप लगाये गये हैं , चाहे सही हों या गलत, तो इन पर गौर करना ही होगा. हमारे सामने जो बातें आयी हैं वे चौंकाने वाली हैं. पीठ ने राजेश्वर सिंह से कहा, आप सिर्फ एक अधिकारी हैं. आपको सीधे ही क्लीन चिट नहीं दी जा सकती. हर व्यक्ति जवाबदेह है. आपको भी किसी कार्रवाई के लिए जवाबदेह होना चाहिए. आपके खिलाफ गंभीर आरोप हैं. बता दें कि खुद को खोजी पत्रकार होने का दावा करने वाले रजनीश कपूर ने शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि राजेश्वर सिंह ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है और इसकी जांच की जानी चाहिए.
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सुब्रमण्यम स्वामी ने कपूर की यचिका में हस्तक्षेप की अनुमति के लिए याचिका दायर की है
राजेश्वर सिंह ने कपूर के खिलाफ अलग से अवमानना याचिका भी दायर की है और इसमें दावा किया है कि एयरसेल – मैक्सिस सौदा मामले की जांच को पटरी से उतारने और इसमें विलंब के प्रयास किये जा रहे हैं. भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कपूर की यचिका में हस्तक्षेप की अनुमति के लिए आवेदन दायर किया है. शीर्ष अदालत ने 12 मार्च को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को एयरसेल – मैक्सिस सौदे को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा दी गयी मंजूरी में कथित अनियमित्ताओं की जांच का काम छह महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था. इस मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम से जांच एजेन्सियों ने पूछताछ की है.
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