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सैकड़ों कर्मियों की कमी से जूझ रहा रांची नगर निगम, कई वर्षों से नहीं निकला कोई विज्ञापन

Ranchi : राजधानी की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने वाला रांची नगर निगम इन दिनों सैकड़ो कर्मियों की कमी से जुझ रहा है. ये बात तो स्वयं नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह भी स्वीकार करते हैं कि निगम में मैनपावर की कमी है. लेकिन इस कमी का एक कारण स्वयं विभाग को माना जा सकता है. इसके पीछे का कारण निगम में कर्मियों की नियुक्ति को लेकर पिछले कई वर्षों से किसी तरह का कोई विज्ञापन नहीं जारी करना है. जब रांची शहर की जनसंख्या कम थी, तो उस समय निगम में कर्मचारियों की संख्या काफी ज्यादा थी. लेकिन जैसे-जैसे शहर की जनसंख्या की बढ़ती गयी, निगम में कर्मियों की संख्या कम होती गयी. दूसरी ओर विडंबना यह भी है कि नगर निगम के आला अधिकारी भी निगम में कार्यरत कर्मचारियों के सेवा कार्य के प्रति ध्यान नहीं देते हैं. दरअसल जिस करार के तहत निगम में कई सिटी मैनेजरों ने काम शुरु किया था, उसे भी नगर विभाग द्वारा पूरा नहीं किया गया. 

Nitesh ojha

Ranchi : राजधानी की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने वाला रांची नगर निगम इन दिनों सैकड़ो कर्मियों की कमी से जुझ रहा है. ये बात तो स्वयं नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह भी स्वीकार करते हैं कि निगम में मैनपावर की कमी है. लेकिन इस कमी का एक कारण स्वयं विभाग को माना जा सकता है. इसके पीछे का कारण निगम में कर्मियों की नियुक्ति को लेकर पिछले कई वर्षों से किसी तरह का कोई विज्ञापन नहीं जारी करना है. जब रांची शहर की जनसंख्या कम थी, तो उस समय निगम में कर्मचारियों की संख्या काफी ज्यादा थी. लेकिन जैसे-जैसे शहर की जनसंख्या की बढ़ती गयी, निगम में कर्मियों की संख्या कम होती गयी. दूसरी ओर विडंबना यह भी है कि नगर निगम के आला अधिकारी भी निगम में कार्यरत कर्मचारियों के सेवा कार्य के प्रति ध्यान नहीं देते हैं. दरअसल जिस करार के तहत निगम में कई सिटी मैनेजरों ने काम शुरु किया था, उसे भी नगर विभाग द्वारा पूरा नहीं किया गया. 

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कार्यरत हैं कुल 426 कर्मचारी, बोझ से करते हैं काम

निगम से जुड़े अधिकारियों को कहना है कि निगम में इन दिनों करीब कुल 426 कर्मचारी कार्यरत हैं. इसमें रांची व डोरंडा कार्यालय को मिलाकर कुल 253 स्टाफ कार्यरत हैं. जबकि सफाई कर्मचारियों की संख्या कुल 273 है. वर्तमान में रांची की जनसंख्या करीब 16 लाख के पास आ चुकी है. इस हिसाब से निगम के तहत कार्य करने वाले कर्मचारियों की संख्या कुल 5000 होनी चाहिए. वही स्टाफ में क्लर्कों की संख्या 500 से 600 होनी चाहिए. कर्मियों की संख्या कम होने के कारण निगम के कर्मचारी आज कार्य के बोझ से दबे हुए हैं और काम करने को विवश हैं. 

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कई वर्षों से नहीं निकाली गयी विज्ञापन नियुक्ति

निगम में नियुक्ति कर्मियों की संख्या तो कम है ही, दूसरी ओर निगम में नये पदों की भर्ती के लिए पिछले कई वर्षों से विज्ञापन नियुक्ति भी निकाला गया है. एक अनुमान के मुताबिक जब रांची की जनसंख्या करीब पांच लाख थी, तो उस समय रांची नगर निगम में कर्मियों की संख्या करीब पांच हजार थी. लेकिन आज जब रांची की जनसंख्या काफी 16 लाख तक हो चुकी है, तो निगम में कर्मियों की संख्या काफी कम हो गयी है. 

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दबाव में कार्य करने को विवश हैं निगम के कर्मचारी

निगम के विभिन्न शाखाओं में कार्यरत कर्मियों की संख्या जब न्यूज विंग संवाददाता ने निगम की स्थापना शाखा से लेनी चाही, तो शाखा द्वारा कोई विशेष जानकारी नहीं दी गयी. जब विभाग में कर्मियों की संख्या की छानबीन की गयी तो सबसे विचित्र स्थित आईटी विभाग में मिला. इस विभाग में केवल एक ही व्यक्ति पूरे काम को संभाले हुए था. जबकि इस विभाग में कुल 20 आईटी स्तर के कर्मियों की जरुरत है. जलबोर्ड में तो कई पद अभी तक भरे ही नहीं गये हैं. जैसे कि कार्यपालक अभियंता के स्वीकृत दो पदों में एक, सहायक अभियंता के तीन में से एक, कनीय अभियंता के छह पद में से तीन, पाईप लाईन इंस्पेक्टर के आठ पद में से पांच पद अभी तक नहीं भरे गये हैं. 

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करार के तहत सिटी मैनेजर को नहीं मिल रहा लाभ

नगर विकास विभाग के द्वारा वर्ष 2015 में सिटी मैनेजर को लेकर कई पद विज्ञापन द्वारा निकाला गया था. विज्ञापन में इस बात का जिक्र था कि नियुक्ति होने वाले सिटी मैनेजरों को वेतन के साथ हाउस रेंट अलाउंस, परिवहन भत्ता सहित अन्य सुविधाएं देने की बात की गयी थी. वर्तमान में निगम में कुल आठ सिटी मैनेजर कार्यरत हैं. लेकिन नियुक्ति के समय करार के तहत जो सुविधा विज्ञापन में वर्णित है, वे सभी इन सिटी मैनेजरों को नहीं दी जा रही है. जबकि ये सिटी मैनेजर स्वच्छता, परिवहन, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल बोर्ड जैसे कार्यों को देख रहे हैं.

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