
Ranchi: आजसू पार्टी ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट के सवाल पर झामुमो को निशाने पर लिया है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव बनाये जाने के बाद लंबोदर महतो ने कहा है कि झामुमो को इसकी जानकारी रहना चाहिए कि अर्जुन मुंडा की सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए हेमंत सोरेन ने भूमि सुधार और राजस्व विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी जिसमें सीएनटी एक्ट की धारा 21 और एसपीटी एक्ट की धारा 13 को संशोधन करने की बात थी. तब हेमंत सोरेन ने मंजूरी देते हुए टिप्पणी की थी कि यह प्रस्ताव राजस्व हित में और तार्किक है. भू-राजस्व मंत्री रहते हुए मथुरा महतो ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी थी.
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एसआईटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है सरकार
लंबोदर महतो ने कहा है कि वैसे राज्य की जनता इससे वाकिफ है कि बीजेपी सरकार को इस मुद्दे पर बैकफुट पर जाना पड़ा है. उन्होंने कहा कि आजसू लगातार सरकार से मांग करती रही है कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन हस्तांतरण करने वालों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाये तथा सख्त कार्रवाई भी हो. भाजपा को भी जनता को यह बताना चाहिए कि एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने में सरकार को क्या परेशानी है. जनता हेमंत सोरेन से जानना चाहती है कि वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने इन कानूनों में संशोधन की वकालत करने के बाद भी इस मुद्दे पर जनता के रहनुमा बनने का प्रपंच क्यों किया. साथ ही झामुमो जनता के बीच जाकर यह बताने से क्यों गुरेज करता है कि इन कानूनों का सबसे ज्यादा उल्लंघन किन लोगों ने किया है.
स्थानीयता के मुद्दे पर राजनीतिक रोटी सेंकना झामुमो का मकसद
उन्होंने कहा कि लगभग 23 महीने तक झामुमो के नेतृत्व में राज्य में सरकार रही. उस समय झामुमो की ओर से स्थानीयता तय क्यों नहीं की गयी और तो और हेमंत सोरेन ने जेपीएससी से क्षेत्रीय भाषाओं को ही हटा दिया. झामुमो स्थानीयता को एक मुद्दा बना कर रखना चाहती है ताकि वो इसकी रोटी सेंकती रहे और भोली-भाली जनता को गुमराह करती रहे. यह आजसू के प्रखर विरोध का ही परिणाम है कि सरकार को स्थानीय नीति में संशोधन के लिए बाध्य होना पड़ा. आजसू नेता ने कहा है कि महागठबंधन की दुहाई देने वाले विरोधी दलों के नेताओं को झामुमो का सच जानना चाहिये कि वे लोग कैसे भोले-भाले झारखंडी जनता को बरगला कर वोट की राजनीति में जुटे हैं.
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