
Creedy (Jammu and Kashmir) : अंग्रेजी अखबार राइजिंग कश्मीर के प्रधान संपादक शुजात बुखारी को उनके पैतृक गांव में आज सुपुर्दे खाक किया गया. उनके जनाजे में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया. अखबार के कार्यालय के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने गुरूवार उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. जिस समय पत्रकार को सुपुर्दे खाक करने की तैयारी चल रही थी, उसी समय राइजिंग कश्मीर के पाठक काले रंग की पृष्ठभूमि में शुजात की तस्वीर के साथ राइजिंग कश्मीर का अंक पढ़ रहे थे. राइजिंग कश्मीर का दैनिक संस्करण शुक्रवार को बाजार में आया, जिसमें पहले पूरे पन्ने पर काले रंग की पृष्ठभूमि में दिवंगत प्रधान संपादक की तस्वीर है. पन्ने पर एक संदेश लिखा है: अखबार की आवाज दबाई नहीं जा सकती
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‘हमसे छीनने वाले कायर हमारी आवाज दबा नहीं सकते’
इसमें लिखा है कि आप अचानक चले गए, लेकिन अपने पेशेवर दृढ़ निश्चय और अनुकरणीय साहस के साथ आप हमारे लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे. आपको हमसे छीनने वाले कायर हमारी आवाज दबा नहीं सकते. सच चाहे कितना भी कड़वा क्यों न हो लेकिन सच को बयां करने के आपके सिद्धांत का हम पालन करते रहेंगे. आपकी आत्मा को शांति मिले. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बुखारी की हत्या के बावजूद दैनिक को प्रकाशित करना, उनके प्रति सबसे उचित श्रद्धांजलि है क्योंकि दिवंगत पत्रकार भी यही चाहते थे. उमर ने अखबार के पहले पन्ने की तस्वीर को साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा कि काम जारी रहना चाहिए, शुजात भी यही चाहते होते. यह शुक्रवार का राइजिंग कश्मीर का अंक है. इस बेहद दुख की घड़ी में भी शुजात के सहयोगियों ने अखबार निकाला, जो उनके पेशवराना अंदाज का साक्षी है और दिवंगत बॉस को श्रद्धांजलि देने का सबसे सही तरीका है.
अखबार का यह संदेश पत्रकार के जनाजे में उपस्थित लोगों की नम आंखों में तैर रहा था. भारी बारिश के बावजूद बारामूला जिले के इस गांव में हजारों लोग नम आंखों से बुखारी के जनाजे के साथ-साथ चल रहे थे. बुखारी के जनाजे में शामिल होने उनके पैतृक गांव आनेवालों में विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी तथा भाजपा के मंत्री भी शामिल थे. जनाजे में शिरकत कर रहे लोगों ने बताया कि गांव में इससे पहले कभी किसी ने ऐसा जनाजा नहीं देखा, जिसमें इतनी तादाद में लोग शामिल हुए हों. बड़ी संख्या में यहां लोगों के पहुंचने से यातायात जाम हो गया था.
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इफ्तार से पहले अज्ञात बंदूकधारियों ने कर दी थी हत्या
बुखारी और उनके दो अंगरक्षकों की गुरूवार शाम इफ्तार से थोड़ा पहले श्रीनगर के लाल चौक के निकट प्रेस एनक्लेव में राइजिंग कश्मीर के कार्यालय के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. बुखारी घाटी में शांति के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. वह पाकिस्तान के साथ ट्रैक-2 प्रक्रिया का हिस्सा भी थे. पत्रकार के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं. आतंकवादी कश्मीर के तीन दशक के हिंसा के इतिहास में बुखारी समेत चार पत्रकारों की जान ले चुके हैं. अलसफा के संपादक मोहम्मद शाबान वकील की 1991 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने हत्या कर दी थी.
बीबीसी के पूर्व पत्रकार युसूफ जमील 1995 में तब घायल हो गए थे जब उनके दफ्तर में एक बम विस्फोट हुआ था लेकिन उस घटना में एएनआई के कैमरामैन मुश्ताक अली की मौत हो गई थी.इसके बाद, 31 जनवरी 2003 को एनएएफए के संपादक परवाज मोहम्मद सुल्तान की उनके प्रेस एनक्लेव स्थित कार्यालय में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
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