धनबादः पहली से आठवीं कक्षा में शिक्षक के पद पर बहाल होने के लिए अब टीइटी परीक्षा पास होना अनिवार्य है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम में इस परीक्षा की उत्तीर्णता को शिक्षक के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित किया गया है.
इसके बाद सरकारी हो या प्राइवेट स्कूल इन कक्षाओं के शिक्षक बनने के लिए टीइटी परीक्षा पास करना अनिवार्य हो गया है. दरअसल नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के तहत शैक्षणिक व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता पड़ी. इसके अलावा बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा देना भी जरूरी था. इसको देखते हुए टीइटी परीक्षा कंडक्ट किया जाने लगा और इस परीक्षा को शिक्षक नियुक्ति की न्यूनतम योग्यता निर्धारित कर दिया गया.
टीइटी परीक्षा को शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में शिक्षक गुणवत्ता के नेशनल स्टैंडर्ड व बेंच मार्क के तौर पर देखा जाता है. यह परीक्षा दो पेपर की होती है. पेपर एक पहली से पांचवीं कक्षा तक के शिक्षक बनने के लिए एवं पेपर दो छठी से आठवीं कक्षा तक के शिक्षक बनने के लिए देना होता है. पहली से आठवीं कक्षा तक शिक्षक बनने को इच्छुक उम्मीदवार को दोनों पेपर की परीक्षा देनी होती है. दोनों परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं, लेकिन खास बात है कि इसमें कोई नेगेटिव मार्किग नहीं होती.
पहली से पांचवीं की परीक्षा के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ सीनियर सेकेंडरी में उत्तीर्ण या प्रारंभिक शिक्षा में दो वर्षिय डिप्लोमा होना चाहिए जबकि छठी से आठवीं कक्षा के लिए किसी भी स्ट्रीम में स्नातक एवं प्रारंभिक शिक्षा में दो वर्षिय डिप्लोमा होना चाहिए.
इस साल 18 नवंबर को सीबीएसइ टीइटी परीक्षा का आयोजन किया जायेगा. पहली से आठवीं कक्षा के शिक्षक बनने के लिए इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. सामान्य व पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को किसी एक पेपर की परीक्षा पर 500 एवं दोनों पेपरों की परीक्षा पर 800 रुपये शुल्क लगेंगे. अनुसूचित जाती, अनुसूचित जनजाति एवं विकलांग वर्ग को किसी एक पेपर पर 250 एवं दोनों पेपर पर 400 रुपये लगेंगे.




