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शांता कुमार बयान पर कायम, भाजपा ने आलोचना की

नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने मंगलवार को कहा कि मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले को लेकर अपनी टिप्पणी पर कायम हैं। दूसरी ओर भाजपा ने इस टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की है। शांता कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने एक लंबी यात्रा तय की है और इस दौरान पार्टी ने बहुत-सी उपलब्धियां हासिल की हैं, अपने सदस्यों को गौरवान्वित किया है।”

उन्होंने व्यापमं घोटाले का जिक्र करते हुए आगे कहा, “लेकिन जब इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो ये पार्टी को कलंकित करती हैं और सदस्यों को आहत करती हैं।”

उन्होंने कहा, “मैंने पत्र के माध्यम से सिर्फ अपने विचार प्रकट किए हैं और जो कुछ लिखा है, उस पर कायम हूं।”

शांता कुमार ने हिंदी में लिखे पत्र में कहा है कि व्यापमं घोटाले की वजह से पार्टी के सभी सदस्यों का सिर शर्म से झुक गया है। उन्होंने यह पत्र अपने फेसबुक और ट्विटर खातों पर भी साझा किया है।

भाजपा के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार में भर्तियों और दाखिला परीक्षा को लेकर हुए घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है। इस मामले से जुड़े 40 से ज्यादा लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।

भाजपा ने इसके पहले शांता कुमार के विचारों और उनकी टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया था।

संसदीय मामलों के राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा, “हम शांता कुमार को परिपक्व एवं समझदार नेता मानते हैं। लेकिन वह कांग्रेस के दुष्प्रचार से प्रभावित लगते हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने जो कुछ भी कहा या लिखा है, उससे हम पूर्णत: असहमत हैं।”

शांता कुमार ने कहा था कि एक आचार समिति गठित की जानी चाहिए, जो भ्रष्टाचार मिटाने की दिशा में लोकपाल की भूमिका निभाए।

उन्होंने सरकार में शामिल नेताओं पर नजर रखने के लिए लोकपाल के गठन का मशवरा देते हुए भाजपा शासित राजस्थान और महाराष्ट्र का उदाहरण पेश किया था। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व प्रमुख ललित मोदी से जुड़ा है। वहीं, महाराष्ट्र में भाजपा के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।

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