दुमका: यदि काबिलियत और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तब ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े और शिक्षित होने वाले बच्चे भी अपने जीवन में काफी उन्नति कर सकते हैं। दुमका के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा ने झारखण्ड शिक्षा परियोजना दुमका द्वारा आउटडोर स्टेडियम दुमका में आयोजित ग्राम शिक्षा समिति के सदस्यों का जिला स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपने अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने संस्कारपूर्ण गुणवत्तायुक्त शिक्षा दिये जाने की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अक्सर राजनीतिक विरोध को दर्शाने के लिए युवा राष्ट्रीय और निजी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह दोषपूर्ण शिक्षा का परिचायक है। उपायुक्त ने कहा कि प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के किताब, पोशाक, यातायात, बच्चों के भोजन एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अभिभावकों को कुछ न कुछ खर्च करना होता है। परन्तु प्रत्येक सरकारी विद्यालयों में यह सुविधायें मुफ्त उपलब्ध करायी जाती है। यदि शिक्षक, अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन समिति संकल्प ले ले तो वह दिन दूर नहीं जब देश का एक एक बच्चा न सिर्फ साक्षर होगा बल्कि देश का एक महत्वपूर्ण मानव संसाधन बन सकेगा।
(आईपीआरडी)




