
Murli Manohar Mishra
2014 में देश की सत्ता में आने के लिए बीजेपी ने नारा दिया था-‘सबका साथ, सबका विकास.’ बीजेपी के इस मंत्र को लोगों ने भी हाथोंहाथ ले लिया, और बीजेपी को भारी बहुमत से सत्ता मिल गई. पिछले चार सालों में बीजेपी नीत एनडीए की सरकार ने सॉफ्ट हिंदुत्व के सिद्धांत पर काम करने की भी कोशिश की. मकसद था अल्पसंख्यक समुदाय के मन में बीजेपी के प्रति विश्वास पैदा करना. मगर इस फार्मूले से बीजेपी को खास कामयाबी नहीं मिली. वहीं, बीजेपी ने दलितों को साधने के लिए भी अनेक प्रयास किये. पर ये मामला भी हाथ से फिसलता दिख रहा है. ऐसे में बीजेपी को इस बात की चिंता है कि उसके सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड से उसकी परंपरागत पहचान यानि उग्र हिंदुत्व को नुकसान पहुंच रहा है, जो बीजेपी के लिए अब तक के चुनावों में रामबाण साबित हुआ है.
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क्या है बीजेपी की चिंता ?
भाजपा की चिंता के बढ़ने का एक बड़ा कारण ये भी है कि यूपी के उपचुनाव में बीजेपी को पराजय का मुंह देखना पड़ा. नुकसान बेशक छोटा था, मगर बात बीजेपी की प्रतिष्ठा की भी थी, जिसे करारा झटका लगा, बुआ और भतीजा ने मिलकर बीजेपी को फूलपुर और गोरखपुर सीट जीतकर अचानक चौका दिया. वहीं देश में जातीय और दलीय समीकरण भी बीजेपी के खिलाफ बड़े मोर्चे का रूप लेते दिख रहे हैं. लिहाजा बीजेपी को लगने लगा है कि अब विकास के नारे सा काम नहीं चलेगा. ऐसे में एक बार फिर भाजपा उग्र हिंदुत्व की ओर लौटती नजर आ रही है, जिसकी बानगी है देश के कई राज्यों में रामनवमी के दौरान सांप्रदायिक हिंसा. वजह चाहे कुछ भी हो, मगर इससे आगामी चुनाव में बीजेपी के लिए ध्रुवीकरण का काम आसान हो जाएगा और इसके प्रयास भी तेज हो गए हैं.
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विकास से नहीं, हिंदुत्व से बनेगी बात ?
बिहार और बंगाल में रामनवमी के दौरान जिस प्रकार से हिंसा भड़की और उसपर जो सियासी रणनीतियां बनने लगी, उससे यही इशारा मिलता है कि आने वाले वक्त में बीजेपी उसे हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं को दबाए जाने का मामला बताकर बंगाल के हिंदु मतदाताओं का साधने की भरसक कोशिश करेगी. अगर वो इसमें सफल होती है, तो टीएमसी और वाम दलों के सामने भारी मुश्किल खड़ी हो सकती है. इसी तरह भाजपा देश भर में हिंदुत्व के हथियार से विपक्षी दलों का मुकाबला करने की तैयारी करती नजर आ रही है.
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आक्रामक हिंदुत्व की ओर बीजेपी ?
बीजेपी की एक चिंता ये भी है कि 2019 तक राम मंदिर नहीं बनने से उसे जनता को जवाब देने में दिक्कत होगी, वहीं प्रवीण तोगड़िया ने भी अपने पत्र में मोदी को हिंदुत्व के एजेंडे की याद दिलायी है. एक दिक्कत ये भी है कि नरम रुख से अचानक एग्रेसिव मोड में आना सियासत में उतना आसान नहीं होता, ऐसे में अभी से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की जमीन तैयार की जा रही है. ताकि चुनाव के वक्त आक्रामक हिंदुत्व के एजेंडे पर लौटा जा सके. मौजूदा हालात में बीजेपी की नजर कर्नाटक और बंगाल पर तो है ही, ज्यादा फोकस 2019 के बड़े मिशन पर है.
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