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रोजगार और संशोधित श्रम क़ानून के खिलाफ मजदूरों का सत्याग्रह, आक्रोशित संगठनों ने कहा- ‘जेल से भी बदतर हालात’

 Md. Asghar Khan

Ranchi : “सरकार बेरोजगारी की फौज खड़ी करना चाहती है. भूख और तंगहाली से जूझ रहे मजदूरों को बड़ी कंपानियों के समक्ष सस्ते या कच्चे माल की तरह परोसने की तैयारी की जा रही है. आज मजदूरी इतनी कम है कि इसे आधुनिक गुलामी का दौर कह सकते हैं.“ ये वक्तव्य काफी रोष में मजदूर नेता भुवनेश्वर केवट की कंठ से निकलते हैं.  भुवनेश्वर केवट ने आगे कहा कि, ‘30 जनवरी‘ यानी महात्मा गांधी की शहादत दिवस पर देश के सभी ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी सत्याग्रह किया जायेगा. इसमें रांची समेत समस्त झारखंड के मजदूरों का राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों और निर्णयों के खिलाफ सड़कों पर आक्रोश फूटेगा. जिसमें भाजपा के खिलाफ सभी मजदूर संगठन के बैनर तले संगठित व असंगठित क्षेत्रों के हजारों मजदूर शामिल होंगे.

बेहतर होता जेल में डाल देती सरकार

रांची में निर्माण क्षेत्र में मजदूरी करने वाले डीडी एक्का कहते हैं कि ना काम का ठिकाना है, न ही नियमित रोजगार है. काम के बदले मिलने वाली मजदूरी भी नहीं मिलती है. बेहतर होता सरकार जेल में ही हमलोगों को डाल देती. ब्रजकिशोर साहू और सुदामा खालखो की भी यही व्यथा है. वह बताते हैं कि  पिछले चार साल में मेरे जानने वाले सैकड़ों मजदूरों में किसी को भी सरकारी हेल्थ कार्ड नसीब नहीं हुआ है. कम से कम जेल में रहेंगे तो वहां तीन टाइम खाना और रोजगार तो तय है. वहीं राजू महतो का कहना है कि जेल आज की परिस्थितियों से कहीं बेहतर है. भीम साहू कहते हैं कि हमारे बच्चे आज भी शिक्षा की मुख्य धारा से वंचित हैं. अधिकतर ईंट भट्ठे पर काम करने वाली औरतें अपने बच्चों को लेकर पहुंचती हैं. 30 जनवरी को बुलाये गये देशव्यापी सत्याग्रह में हमलोग गिरफ्तारी देंगे, और जेल भरो अभियान होगा.

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72 प्रतिशत सेक्टरों के मजदूरों का अधिकार छिन जायेगा

सीपीआई(एम) झारखंड ईकाई के मजदूर विंग सीटू के महासचिव प्रकाश विपल्व ने कहा कि श्रामिक संघों के सत्याग्रह का निर्णय देश के लगभग दो दर्जन मजदूर संगठनों ने लिया है. इसकी मुख्य वजह सरकार के द्वारा बनायी जा रही नीति और मजदूरों के प्रति उदासीनता है. बार-बार आंदोलन कर विरोध जताने के बाद भी सरकार अपने रवैये पर अड़ी हुई है. इसलिए यह कदम उठाया गया है. उन्होंने बताया कि 1948 के श्रमिक कानून में 44 संशोधन कर इसे कॉरपोरेट को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चार नियमों को बदला जा रहा है. भाजपा शासित सरकारें इसे लागू करने का मन भी बना चुकी हैं, जिसमें राजस्थान और हरियाणा में इसे लागू भी किया जा चुका है. संशोधित कानून बहुत खतरनाक है. मजदूरों और ट्रेड यूनियनों को उनके अधिकारों से वंचित करने की सोची-समझी साजिश है. अगर इसे लागू कर दिया जायेगा, तब 72 प्रतिशत सेक्टरों में मजदूर अपने अधिकार से वंचित हो जायेंगे. क्योंकि इसके अनुसार वैसे कारखानों में ही श्रामिक कानून लागू होगा, जहां मजदूरों की संख्या 100 से ऊपर होगी. वहीं ट्रेड यूनियन भी वैध्य होगा. जबकि देश में 72 प्रतिशत छोटे-छोटे कल-कारखाने हैं, जहां 100 से कम मजदूर काम करते हैं. 

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12 सूत्री मांगों को लेकर सभी जिलों में होगा प्रतिवाद

30 जनवरी को देशव्यापी बुलाये गये सत्याग्रह के तहत विभिन्न राज्यों के सभी जिलों के मुख्यालयों पर लाखों मजदूर अपनी 12 सूत्री मांगो को लेकर धरना, विरोध और प्रदर्शन करेंगे. इसके अलावा कल-कारखानों में भारी संख्या में प्रतिवाद दर्ज करेंगे. झारखंड मजदूर संगठन एक्टू के महासचिव शुभेंदु सेन ने कहा कि जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, डाल्टनगंज, हजारीबाग, रांची के डीसी कार्यालय के बाहर सत्याग्रह होगा. पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी, उसके बाद इस अभियान के तहत भाजपा सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन होगा. इसमें श्रम कानून में संशोधन का विरोध होगा. रोजगार की गारंटी और कम से कम 18,000 प्रति माह वेतन की मांग भी प्रमुख है.

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अंतिम चेतावनी है, अन्यथा अनिश्चितकालीन हड़ताल

इस सत्याग्रह में इस बार मजदूरों के साथ-साथ किसानों का मुद्दा भी उठाया जायेगा. झारखंड एटक महासचिव पीके गांगुली का कहना है कि झारखंड में लगभग दो लाख मजदूर सड़क पर उतरेंगे. इसमें स्कीम वर्कर, पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग होंगे.  इसमें ट्रेड यूनियनों में इटक, एकट, सीटू, एक्टू, एचएमएस, एआइयुटीयुसी, टीयुसीसी और युटीयुसी जैसे प्रमुख संगठन हैं. झारखंड की सरकार ने भी केंद्र की मोदी सरकार की तरह लोगों से रोजगार के नाम पर सिर्फ वादा किया. इसके खिलाफ लोगों में काफी रोष है. उनका कहना है कि चूंकि कई बार आंदोलन और हड़ताल कर मजदूरों की समस्या बता चुके हैं, फिर भी सरकार नजरअंदाज कर रही है. यह सत्याग्रह अंतिम चेतावनी होगी, अगर फिर भी सरकार नहीं जागी, कल – कारखानों में मजदूर अनिश्चतकालीन हड़ताल पर जायेंगे.  

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