
NewDelhi : रूस से S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने में एक पेंच है. वह यह कि इस डील में भारत को अमेरिका की सहमति चाहिए. रूस से भारत हथियार ख्ररीदे तो अमेरिका को क़्या आपत़्ति होनी चाहिए. मामला दरअसल अमेरिकी कानून का है. सूत्रों के अनुसार लगभग 5.5 अरब डॉलर यानी लगभग 39,000 करोड़ रुपये की इस डील के लिए भारत को अमेरिका के एक कानून के तहत छूट की आवश्यकता है. सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार ने अमेरिका को बताया है कि वह रूस से हथियार और साजोसामान पर निर्भरता अचानक कम नहीं कर सकता, क्योंकि दोनों देशों के बीच दशकों से रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग चल रहा है. बता दें कि अमेरिका में डिफेंस और स्ट्रैटेजी से जुड़ा एक वर्ग इस मामले में भारत के साथ है. उनका मानना है कि अगर भारत पर बंदिशें लगाई जाती हैं, तो इससे अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते खराब हो सकते हैं. साउथ और साउथ ईस्ट एशिया के लिए अमेरिका के उप-रक्षामंत्री जो फेलर ने हाल ही में बयान दिया था कि हमें भारत की आशंकाओं की जानकारी है. कहा कि पिछले माह आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में इस पर बात हुई और हम आपसी संबंध मजबूत करना चाहते हैं.
इसे भी पढ़ें- घोषणा कर युवा आयोग बनाना भूल गए रघुवर दास, 12 जनवरी को कहा था 15 सदस्यों वाला होगा आयोग
भारत अभी भी सबमरीन और मिसाइल के लिए रूस पर निर्भर
रक्षा विशेषज्ञ कारा अबरक्रॉम्बि के अनुसार आज की तारीख में भारत के लिए अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा डिफेंस सप्लायर बन गया है. खासतौर पर एयरक्राफ्ट और आर्टिलरी के क्षेत्र में. भारत अभी भी सबमरीन और मिसाइल के लिए रूस पर काफी निर्भर करता है, क्योंकि अमेरिका इन्हें उपलब्ध कराने में दिलचस्पी नहीं रखता. कहा गया कि भारत हाई-एंड वेपन सिस्टम चाहता है. वह दुनिया में अकेला ऐसा देश है, जिसका दो परमाणु पड़ोसियों, पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद है. भारत ने दोनों के खिलाफ युद्ध लड़ा है. कहा कि भारत को रूस से सप्लाई बंद करने के लिए मजबूर करने पर उसकी सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा होगा.
इसे भी पढ़ें- स्वास्थ्य सचिव ने किया रिम्स का निरीक्षण, अधीक्षक से कहा, “नहीं सुधार सकते व्यवस्था तो दें इस्तीफा”
S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम काफी ताकतवर है
रूस का दावा है कि S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम काफी ताकतवर है. उसने चीन को इसकी सप्लाई शुरू की है और सीरिया में भी इसे तैनात किया है. भारत और रूस ने 2016 में वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान इस मिसाइल सिस्टम को खरीदने पर एक समझौता किया था. इसके बाद से दोनों देशों के बीच इससे जुड़े कॉन्ट्रैक्ट को लेकर मोलभाव किया जा रहा है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामण और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु के बीच मॉस्को में इस महीने की शुरुआत में हुई मीटिंग में S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की डील पर चर्चा हुई थी. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अक्टूबर में भारत आ रहे हैं.
न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.




