|| नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य का पक्ष रखा ||
नई दिल्ली : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में राज्य का पक्ष रखा। उन्होंने झारखण्ड द्वारा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापन अधिनियम के मुद्दे पर चर्चा के क्रम में समय की आवश्यकता के अनुरूप नये अधिनियम को अपरिहार्य बताते हुए कहा कि झारखण्ड राज्य के परिप्रेक्ष्य में यह अत्यंत आवश्यक है। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी झारखण्ड में सड़क मार्ग का घनत्व राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
श्री दास ने कहा कि गांव में रहने वाले किसान और जन-साधारण को अबाधित सड़क-रेल सम्पर्क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य के लिए अस्पतालों की व्यवस्था, शिक्षा की समुचित व्यवस्था का मौलिक अधिकार है और यह तभी संभव है जब अधिग्रहण की प्रक्रिया सरल हो। गौरतलब है कि झारखण्ड की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। इस अर्थ में वस्तुतः एल.ए.आर.आर. अधिनियम किसानों के तथा गांवों में निवासित जन-सामान्य के हित में है।
उन्होंने बैठक में कहा कि किसी भी किसान या जन-सामान्य जिसकी भूमि अधिगृहित की गई हो, उनका विस्थापन बगैर पुनर्वास किये नहीं किया जाये।
मुख्यमंत्री ने सदस्यों को जानकारी दी कि इस अधिनियम के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा नियमावली बनाकर इसे अधिसूचित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहण होने पर बाजार दर का चार गुना तथा शहरी क्षेत्र में बाजार दर का दो गुना मुआवजा़ भुगतान के प्रावधानों को कार्यान्वित कर दिया है।
श्री दास ने एल.ए.आर.आर. अधिनियम का विरोध करने वाले लोगों को ग्रामीण विकास में बाधक बताया तथा उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि यदि आवश्यक समझा जाये तो ऐसे अधिकारों या व्यवस्था को राज्य सरकारों को विकेन्द्रीत करने पर विचार किया जा सकता है, जिससे विभिन्न राज्य सरकार अपनी आवश्यकता अनुरूप भूमि अधिग्रहण कर विकास कार्य को गति प्रदान कर सकें।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण भारत के त्वरित विकास तथा जन-सामान्य को विकास के केन्द्र में रख कर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए नरेन्द्र मोदी के प्रयासों के प्रति आभार प्रकट किया।




