
Ranchi : बोकारो के व्यवहार न्यायालय ने मॉब लिचिंग के एक मामले में फैसला सुनाया. इस केस के दस आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय- गुलाम हैदर की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया. साथ ही कोर्ट ने मॉब लिचिंग मामले के सभी अभियुक्तों को मृतकों के आश्रितों को 14-14 हजार मुआवजा देने का भी आदेश सुनाया है.
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2017 में आया था मामला
गौरतलब है कि साल 2017 में चार अप्रैल को चंद्रपुरा थाना के नर्रा गांव में भीड़ ने बच्चा चोरी के आरोप में शमसुद्दीन अंसारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. इसी मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है. जिस दिन घटना घटी थी, उसी दिन शमसुद्दीन अपने रिश्तेदार से मिलने नर्रा गांव गया था और उसकी पीट-पीटकर लोगों ने हत्या कर दी. साथ ही घटना के बाद उग्र भीड़ ने पुलिस पर भी पथराव किया था. जिसके बाद मृतक के परिजन नायमुल बीबी ने मॉब लिचिंग का मामला दर्ज कराया था.
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए किशोर दसौंधी, सागर तुरी, सूरज कुमार वर्णवाल, मनोज तुरी, सोनू तुरी, छोटिया कोयरी, राम कुमार कोयरी, जितेंद्र ठाकुर, जितेंद्र रजक के अलावा चंदन दसौंधी को दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा सुनायी. जबकि इस मामले में एक अन्य आरोपी रति पंडित को पुलिस खोज रही है, जिससे इसके खिलाफ सुनवाई पूरी नहीं हो पायी.
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सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से एसपी, डीआईजी और डीजीपी को सजा के फैसले की कॉपी भेजेने का आदेश दिया. वहीं बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि इस मामले में उनके कलाइंट हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे. इस मामले में लोक अभियोजक संजय कुमार ने बताया कि मॉब लिचिंग के मामले में राज्य में यह दूसरी सजा है. क्योंकि इससे पहले रामगढ़ फार्स्ट ट्रैक कोर्ट ने गोमांस तस्करी के आरोप में अलीमुद्दीन हत्याकांड में शामिल 12 में से 11 आरोपियों का आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी.
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