
Ranchi : सरकार एवं यूनिसेफ के तत़्वावधान में कानून पर दो दिवसीय परामर्शी कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में सामाजिक संगठन बच्चों के नामांकन व उनके स्कूलों में ठहराव को लेकर उनके द्वारा किये गये सकारात्मक उदाहरण और खोजों को प्रस्तुत करेंगे. बताया गया है कि यह परामर्शी कार्यशाला खामियों या चुनौतियों की पहचान करने का भी अवसर प्रदान करेगी, जो किसी खास विषय या भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती हैं. इस अवसर पर यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ मधुलिका जोनाथन ने कहा कि यूनिसेफ संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकार समझौता (1989) में वर्णित बच्चों के जीवन, संरक्षण, विकास तथा भागीदारी के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
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स्कूली शिक्षा कार्यक्रम का अभिन्न अंग होना चाहिए
झारखंड शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक डॉ शैलेश चैरसिया ने कहा कि जीवन कौशल शिक्षा, स्कूली शिक्षा कार्यक्रम का अभिन्न अंग होना चाहिए. अलग-अलग छात्रों की अलग पृष्ठभूमि, आवश्यकताएं तथा स्वभाव होती हें. शिक्षा प्रणाली और समाज को प्रत्येक बच्चे की विविधता और विशिष्टता के सम्मान को वृहत पैमाने पर बढ़ावा देना चाहिए. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक उमा शंकर सिंह ने कहा कि शिक्षकों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि यह बच्चों के पठन-पाठन को प्रभावित करती है. परामर्शी कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय और जमीनी स्तर के संगठनों, शिक्षाविदों, जेसीइआरटी तथा जेइपीसी के अधिकारियों, यूनिसेफ के जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ कुमार प्रेमचंद व शिक्षा विशेषज्ञ पारूल शर्मा ने भी शामिल थे.
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