
New Delhi : सबसे लंबे समय तक देश पर राज करने वाली और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है. वित्तीय स्थिति में इस गिरावट के कारण उसे 2019 के लोकसभा चुनावों में बेहद मुश्किल हालात से गुजरना पड़ सकता है. ऐसे में इसका असर कांग्रेस के मोदी को सत्ता से हटाने के मुहिम पर भी पड़ सकता है. यह महज एक कयासबाजी नहीं बल्कि ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कांग्रेस को फंड की इतनी दिक्कत हो गई है कि उसके लिए कई राज्यों में पार्टी के कार्यालयों का संचालन करना भी मुश्किल हो रहा है. इसी अर्थाभाव में उसने कई राज्यों में पार्टी कार्यालयों के संचालन हेतु जरूरी पैसा भेजने पर भी रोक लगा दी है. कांग्रेस सूत्रों की माने तो इस संकट से उबरने के लिए पार्टी के सदस्यों से योगदान और पदाधिकारियों से खर्च में कटौती का आग्रह किया गया है.
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81.18 फीसदी बढ़ी बीजेपी की कमाई, कांग्रेस की 14 फीसदी घटी
इससे पहले एडीआर की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि राजनीतिक चंदा हासिल करने के मामले में भाजपा ने रिकॉर्ड बढ़त हासिल की है. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानि एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2016-17 के बीच भारतीय जनता पार्टी की आमदनी में 81.18 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस वृद्धि के साथ बीजेपी की आमदनी बढ़कर 1,034.27 करोड़ रुपये दर्ज की गई है. वहीं इसी समयावधि में देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की आमदनी में 14 फीसदी की गिरावट आई है, लिहाजा कांग्रेस की आमदनी घटकर 225.36 करोड़ रुपये पर आकर सिमट गई. आमतौर पर केंद्र की सत्ता पर काबिज राजनीतिक दलों को ही सर्वाधिक राजनीतिक चंदा हासिल होता रहा है, लेकिन बीजेपी ने इस मामले में पहले की कांग्रेस सरकार के समय का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
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कांग्रेस के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत बनाना चुनौती
चाहे कोई भी चुनाव हो, ये सभी जानते हैं कि धनबल के बिना सियासी नैया पार नहीं होती. कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव एक अग्निपरीक्षा है. इसके लिए जनसमर्थन के साथ साथ बेहिसाब धनराशि की भी जरूरत होती है, ताकि चुनाव संबंधी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके. साथ ही प्रचार-प्रसार आदि के लिए बेहतर इंतजाम किए जा सकें. इस मामले में बीजेपी ने अपनी स्थिति तो मजबूत कर ली है, लेकिन कांग्रेस की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई. लिहाजा आगामी लोकसभा चुनाव के दंगल में दम दिखाने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार लाना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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