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मनोज कुमार को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

मुंबई : बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता मनोज कुमार को 47वें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार उन्हें वर्ष 2015 के लिए दिया जाएगा। यह घोषणा शुक्रवार को की गई। एमआईबी इंडिया ने शुक्रवार को ट्वीट किया, “दिग्गज फिल्म अभिनेता मनोज कुमार को वर्ष 2015 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।”

बॉलीवुड में जब भी देशप्रेम की बात की जाती है तो प्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता व निर्देशक मनोज कुमार को जरूर याद किया जाता है। अपने देश के लिए मर मिटने की भावना को फिल्मों में मूर्त रूप प्रदान करने के लिए मनोज कुमार का भारतीय सिनेमा जगत में प्रमुख स्थान रहा है।

उन्होंने ‘क्रांति’, ‘वो कौन थी’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्मों में अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के मन पर छाप छोड़ी।

मनोज कुमार का जन्म पाकिस्तान के एबटाबाद में 24 जुलाई, 1937 को हुआ था। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था। जब वह 10 साल के थे, तभी उनका परिवार देश बंट जाने के कारण दिल्ली आ गया।

मनोज कुमार ने अपनी स्नातक की शिक्षा दिल्ली के मशहूर हिंदू कॉलेज से पूरी की। वह फिल्म निर्माता शशि गोस्वामी के साथ शादी के बंधन में बंधे।

मनोज कुमार ऐसे अभिनेताओं में शुमार हैं, जो कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी रहे हैं।

मनोज कुमार ने अपनी फिल्मों के जरिए लोगों को देशभक्ति की भावना का गहराई से अहसास कराया। इसी ने उन्हें हर दिल अजीज फिल्मकार बना दिया। इसी देशप्रेम की बदौलत उनके चाहने वाले उन्हें ‘मिस्टर भारत’ कहकर पुकाराने लगे।

मनोज कुमार ने 1967 में बनी फिल्म ‘उपकार’ से देशप्रेम पर बनी फिल्मों की सफल शुरुआत के बाद, उन्होंने देशभक्ति पर आधारित कई फिल्मों में काम किया।

मनोज कुमार को ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी?’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘उपकार’, ‘पत्थर के सनम’, ‘नीलकमल’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।

मनोज की 1970 के मध्य में एक के बाद एक तीन हिट फिल्में आईं। जीनत अमान के साथ सामाजिक मुद्दों पर बनी ‘रोटी कपड़ा और मकान’ (1974) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का दूसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया।

इसी दौरान उन्होंने हेमा मालिनी के साथ ‘संन्यासी’ (1975) और ‘दस नंबरी’ (1976) रिलीज हुई, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।

उल्लेखनीय है कि 1992 में, मनोज कुमार को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

फिल्म निर्देशन और कहानी लेखन के लिए मनोज कुमार के नाम 7 फिल्मफेयर पुरस्कार हैं।

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