नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अगले वर्ष मई में होने जा रहे लोकसभा चुनाव के बाद वह तीसरी बार सरकार का नेतृत्व नहीं करना चाहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को देश पर शासन करने का मौका मिलता है तो यह देश के लिए घातक होगा।
दूसरे कार्यकाल के करीब चार वर्ष बिताने के बाद एक दुर्लभतम संवाददाता सम्मेलन में मनमोहन ने यह घोषणा करके सभी को हैरत में डाल दिया कि आम चुनाव के बाद वे नए प्रधानमंत्री को ‘राजदंड’ सौंपना चाहेंगे। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि अगला प्रधानमंत्री भी संप्रग से ही होगा।
लेकिन भाषाई और राष्ट्रीय मीडिया के प्रतिनिधियों की उपस्थिति वाले और 75 मिनट तक चले संवाददाता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी की अप्रत्याशित रूप से तीखी आलोचना की और कहा, “मोदी की योग्यता पर विचार किए बिना मैं मानता हूं कि मोदी का देश का प्रधानमंत्री बनना घातक होगा।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “यदि मजबूत प्रधानमंत्री होने से आपकी मुराद अहमदाबाद की सड़कों पर निर्दोष लोगों का खून बहाने से है तो मुझ में इस प्रकार की ताकत नहीं है।”
भाजपा ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी की तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की और कहा कि इस प्रकार की भाषा के प्रयोग से प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा धूमिल हुई है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि यह संवाददाता सम्मेलन सिर्फ अपनी विदाई की घोषणा करने के लिए था। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन को बकवास करार दिया।
वर्ष 2004 में संप्रग के सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री पद पर बने रहने वाले 81 वर्षीय नेता ने कहा कि अगले कुछ महीनों में होने वाले आम चुनाव के बाद वह नए नेता को प्रधानमंत्री को पदभार सौंप देंगे।
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि यह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा चुना गया प्रधानमंत्री होगा। मैं संप्रग के सत्ता में वापस आने पर प्रधानमंत्री का उम्मीदवार नहीं रहूंगा।”
मनमोहन सिंह ने हालांकि, यह नहीं बताया कि कांग्रेस का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा, लेकिन उन्होंने राहुल गांधी के लिए जमीन तैयार कर दी।
अर्थशास्त्री से राजनीतिज्ञ बने प्रधानमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में भ्रष्टाचार से लेकर पाकिस्तान पर आधारित कई सवालों का जवाब दिया।
अपने प्रदर्शन को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष और मीडिया के विपरीत, इतिहास उनके प्रति विनम्र रहेगा। उन्होंने कहा, “गठबंधन की परिस्थितियों और मजबूरियों को ध्यान में रखते हुए मैंने जो बेहतर हो सकता था वह किया।”
प्रधानमंत्री ने यह स्वीकारा कि आवश्यक वस्तुओं की महंगाई के कारण कांग्रेस को हाल के विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली में पराजय का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा, “मैं यह ईमानदारी से कहूंगा कि बढ़ती महंगाई जनता को कांग्रेस से विमुख करने की वजह रही है।”
मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार को दानव करार दिया, लेकिन साथ ही कहा कि इससे निपटना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार से निपटना आसान नहीं है, भले ही यहां अवसर और चुनौतियां मौजूद हैं। हमें भ्रष्टाचार से मिल कर लड़ना है। इससे सिर्फ एक अकेली पार्टी नहीं निपट सकती। विभिन्न पार्टियों को इस दानव से लड़ने में साथ काम करना होगा।”
उन्होंने कहा कि एक साल पुरानी आम आदमी पार्टी (आप) भ्रष्टाचार से जुड़े जनता के मामले को उठा कर दिल्ली में सत्ता पाई। उन्होंने कहा, “हालांकि, वे सफल साबित होंगे या नहीं, यह समय बताएगा।”
अगले चुनाव में खुद को प्रधानमंत्री पद की होड़ से अलग करते हुए मनमोहन ने कहा कि उन्होंने 10 साल के कार्यकाल का आनंद लिया है और कभी इस्तीफे की जरूरत महसूस नहीं की।
क्या कभी उन्होंने परेशानी के बीच इस्तीफा देने के बारे में सोचा?
उन्होंने कहा, “मुझे इस्तीफा देने का कभी विचार नहीं आया। मैंने अपने काम का आनंद लिया है। मैंने निर्भय होकर निष्पक्षता व ईमानदारी के साथ काम करने की कोशिश की।”
मनमोहन सिंह ने कहा कि वह पाकिस्तान का दौरा करने को इच्छुक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय राजनयिक की गिरफ्तारी पर उपजा भारत-अमेरिका विवाद जल्द समाप्त होगा।
भारत-अमेरिका संबंध पर उन्होंने कहा, “अभी भी कुछ हिचकिचाहट है लेकिन मैं मानता हूं कि यह कुछ समय का अवरोध है और इन मसलों को सुलझाने के लिए कूटनीति को एक मौका देना चाहिए।”
जब उनसे पूछा गया कि वह साल 2004 से सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान क्यों नहीं गए, तो उन्होंने कहा, “मेरा जन्म पश्चिमी पाकिस्तान के एक गांव में हुआ है, लेकिन एक देश का प्रधानमंत्री होने के नाते बेहतर परिणाम को हासिल करने के लिए उपयुक्त स्थितियों के बीच मुझे पाकिस्तान जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “अंतत: मुझे लगता है कि पाकिस्तान दौरे के लिए स्थितियां उपयुक्त नहीं हैं। मैंने पद त्याग से पहले तक पाकिस्तान जाने की उम्मीद नहीं छोड़ी है।”




