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Jamshedpur, 4 September: खाद्य आपूर्ति एवं संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने कांड्रा-चौका रोड पर स्थित पालगम नाला के उपर बन रहे पुल ने गड़बड़ी पकड़ी है. सरयू राय जमशेदपुर से रांची आ रहे थे. इसी दौरान वे पुल के पास रूके. पुल का एक स्पैन धंस जाने के कारण वहां मरम्मत का काम चल रहा था. मंत्री ने देखा कि वहां न कोई इंजीनियर और न ठेकेदार मौजूद था. मौके पर सिर्फ कुछ मजदूर काम कर रहे थे. मंत्री ने स्थानीय लोगों से बातचीत की तो लोगों ने बताया कि कुछ महीने पहले ही पुल बना था और बनने के कुछ दिन बाद ही बीच में गड्ढा हो गया था.
मंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि जेएआरडीसीएल सफेद हाथी बन गया है, जिसे बिना कुछ काम किये सिर्फ कमीशन खाने से मतलब है. उन्होंने पुल निर्माण में लापरवाही को गंभीर मामला बताया और कहा कि वह रांची जाकर संबंधित विभाग से पुल के इतनी जल्दी धंसने और इसके जिम्मेदार लोगों पर की गई करवाई की बाबत जानकारी लेंगे.
इंजीनियर ने दी मंत्री को गलत जानकारी
मंत्री ने मौके से ही पुल निर्माण करने वाली एजेंसी झारखंड एक्सीलरेटर रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (जेएआरडीसीएल) के अभियंता मधुर मित्तल को फोन मिलाया. अभियंता ने मंत्री को बताया कि पुल के बीच में एक लंप आ गया था, इस कारण उसे तोड़कर फिर से मरम्मत कराई जा रही है. यह पूछे जाने पर कि पुल का निर्माण कब हुआ था, इंजीनियर ने कहा कि 2014 में जीकेसी नामक कंपनी ने पुल का निर्माण कराया था. वहीं स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले वर्ष 2016 में यह पुल बना और चालू होने के कुछ महीने बाद ही इसमें गड्ढ़ा और दरार आ गई.
चार जगहों पर बंटा पैसा, गुणवत्ता में कमी आने के कारण टूटा पुल
मंत्री ने कहा कि जैसे अभी मरम्मत कार्य की देखरेख करने के लिए कोई अभियंता या जिम्मेवार व्यक्ति नहीं है, वैसे ही पुल के निर्माण के समय भी इसकी देखरेख के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं रहा होगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने जेएआरडीसीएल को काम दिया, उसने इसे जीकेसी को दे दिया और जीकेसी ने किसी पेटी कॉन्ट्रैक्टर से काम करा लिया. इस प्रकार पुल निर्माण का पैसा चार जगह बंट गया, जिसका सीधा असर पुल के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर दिखाई दे रहा है. पुल के दोनों ओर सड़क पर भी दरार आ गई है.
इसी पुल पर 2 घंटे तक फंसे रहे थे मंत्री
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले इसी पुल के नीचे बने डाईवर्सन पर नाले का पानी चढ़ जाने के कारण मंत्री को दो घंटे तक यहां फंसे रहना पड़ा था.




