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भाजपा के तीन पूर्व विधायकों ने मॉब लिंचिंग के दोषियों की रिहाई को लेकर दिया धरना, हत्या के दोषी 11 गो रक्षकों के परिवार को किया सम्मानित

Ramgarh : भाजपा के तीन पूर्व विधायकों ने अलीमुद्दीन हत्या कांड के दोषियोंं को कथित तौर पर फंसाने के विरोध में एक मई को रामगढ़ में धरना दिया. भाजपा सरकार में मंत्री रहे हजारीबाग सदर के पूर्व विधायक देवदयाल कुशवाहा व बड़कागांव के पूर्व विधायक लोकनाथ महतो ने हत्या कांड में अदालत द्वारा दोषी करार दिये गये 11 गो रक्षकों के परिवार को सम्मानित किया. कार्यक्रम का आयोजन अटल विचार मंच के द्वारा किया गया था और कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा के पूर्व विधायक  शंकर चौधरी कर रहे थे. धरना कार्यक्रम और रामगढ़ बंद के आयोजन को गो रक्षा समिति, बजरंग दल, आरएसएस और अन्य हिंदू संगठनोंं ने समर्थन किया था. अलीमुद्दीन की हत्या के मामले में रामगढ़ पुलिस ने 11 गो रक्षकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. जिन्हें अदालत ने हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है.

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गो रक्षकों को निर्दोष बताते हुए नेताओं ने कहा कि झारखंड सरकार के इशारे पर रामगढ़ जिला प्रशासन ने गो रक्षकों को फंसा कर आजीवन कारावास की सजा दिलायी है. नेताओं ने अलीमुद्दीन हत्याकांड की जांच सीबीआई या एनआइए से कराने की मांग की. इस मांग को लेकर मंच के सदस्यों ने एक मई को रामगढ़ बंद का आह्वान किया था. रामगढ़ में बंद असरदार रहा. गोला में लोगों ने थाना में ही बैठकर धरना दिया. नेताओं ने कहा कि जब तक मामले की सीबीआई या एनआईए जांच शुरु नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. 

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पिछले साल यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गोरक्षा और बीफ के नाम पर देश में कई जगहों पर हिंसा हुई थी. कई जगहों पर भीड़ ने कथित रुप से बीफ ले जाने वालों की हत्या पीट-पीटकर कर दी. 29 जून 2017 को रामगढ़ में भी ऐसी ही घटना हुई थी, जब गोरक्षा समिति के लोगों ने एक मारुति वैन को शहर के बाजारटांड़ में पकड़ा. वैन में कथित रुप से बीफ लदे होने की बात कही गयी. जिसके बाद भीड़ ने वैन को ले जा रहे मो अलीमुद्दीन को पकड़ लिया और पीट-पीटकर  उसे अधमरा कर दिया. भीड़ ने वैन को भी फूंक दिया. पुलिस ने अलीमुद्दीन को इलाज के लिए रांची लाया. लेकिन रास्ते में ही उसके मौत हो गयी. इस मामले में पुलिस अलीमुद्दीन की पत्नी के बयान पर 12 लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 147, 148, 427, 149, 435, 149, 302 व 149 के तहत मामला दर्ज किया था और अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. 

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सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपियों को भादवि की धारा 302 और 120बी के तहत दोषी पाया. जिसके बाद अदालत ने जिन आरोपियों को दोषी पाया, उन्हें रामगढ़ जेल भेज दिया, जबकि नाबालिग छोटे राणा को हजारीबाग स्थित बाल सुधार गृह भेजने का निर्देश दिया था.  गोरक्षा और बीफ ले जाने के नाम पर रामगढ़ में हुए अलीमुद्दीन हत्याकांड में बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया. फास्ट ट्रैक कोर्ट एडीजे-दो ओमप्रकाश की अदालत ने 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. 16 मार्च को अदालत ने कुल 11 आरोपियों को दोषी करार दिया था. जिन आरोपियों को सजा सुनायी गयी है, उनमें दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा और संतोष सिंह समेत 11 लोग शामिल हैं. सुनवाई के दौरान रामगढ़ जिला कोर्ट परिसर में भारी भीड़ थी. कोर्ट परिसर में भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत शहर के लोग फैसले का इंतजार कर रहे थे. 

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