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बिहार और झारखंड नहीं सुलझा सका कोर्ट के बाहर टीवीएनएल का मामला, सुप्रीम कोर्ट में आठ अगस्त को होगी सुनवाई 

Akshay Kumar Jha

Ranchi: टीवीएनएल (तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड) के ऊपर मालिकाना हक बिहार का होगा या झारखंड का ? यह मामला अब तक नहीं सुलझा है. झारखंड अलग होने के बाद झारखंड सरकार ने इसे पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था. लेकिन बिहार–झारखंड अलग होने के बाद से ही दावा करता रहा है कि टीवीएनएल पर उसपर मालिकाना हक है. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों से कहा कि यह मामला दो राज्य से जुड़ा हुआ है. बेहतर होगा कि कोर्ट के बाहर ही दोनों राज्य मिलकर इसे सुलझा लें. लेकिन दोनों राज्य मिलकर ऐसा नहीं कर सके. सोमवार को भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान बिहार की ओर से उसके वकील ने बताया कि झारखंड से मिलकर यह मामला नहीं सुलझाया जा सका. जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि कोर्ट को ही अब मामले को सुलझाना होगा. लिहाजा कोर्ट ने आठ आगस्त 2018 की तारीख फाइनल हेयरिंग के लिए तय कर दी. आठ आगस्त से टीवीएनएल के मालिकाना हक पर सुनवाई शुरू हो जाएगी.

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बिहार सरकार का दावा टीवीएनएल उसका है

साल 2000 में बिहार और झारखंड के अलग होने के बाद ऐसे कई मुद्दे हैं जो दोनों राज्यों के बीच सुलझ नहीं पाए. उसमें एक मुद्दा टीवीएनएल का भी है. तेनुघाट विद्युत निगम की स्थापना 26 नवंबर 1987 में की गई थी. टीवीएनएल बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से लोन लेना था. वर्ल्ड बैंक ने सरकार के नाम पर लोन देने से मना कर दिया. तब जाकर एक निगम की स्थापना की गई. नाम रखा गया तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड. इस निगम का मालिकाना हक गर्वनर ऑफ बिहार को दिया गया. जहां गवर्नर के पास 99 फीसदी निगम के शेयर थे, वहीं एक फीसदी शेयर निगम के चेयरमैन को दिया गया. वर्ल्ड बैंक ने जिस रजिस्टर्ड पते पर निगम को लोन दिया है. वो पता पटना का है. रांची स्थित टीवीएनएल का कार्यालय आज भी रजिस्टर्ड नहीं है. हालांकि झारखंड बनने के बाद झारखंड में ही निगम की स्थापना की गयी. नियम और शर्त बिहार वाले ही रखे गए. 2001 में मामला सुप्रीम कोर्ट में गया. जहां अभी तक मामला लंबित है.

ज्वाइंट वेंचर की अर्जी खारिज कर चुका है सुप्रीम कोर्ट

टीवीएनएल के मामले में बिहार और झारखंड के बीच विवाद की वजह से जब टीवीएनएल ने सुप्रीम कोर्ट से ज्वाइंट वेंचर की अनुमति मांगी थी, तब बिहार ने इसपर आपत्ति जताई थी और कहा था कि झारखंड सरकार चाहे तो बिहार सरकार के साथ ज्वाइंट वेंचर करे. लेकिन उस समय निगम निजी कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर करने को इच्छुक था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर मौखिक रूप से कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और अर्जी को खारिज कर दिया था.

टीवीएनएल के अलावा बिहार से और कौन-कौन से विवाद

केडस्ट्रल मैप, पेंशन बंटवारा, टीवीएनएल और दिल्ली स्थित बिहार भवन में हिस्सेदारी सहित कई मामलों को लेकर झारखंड और बिहार में विवाद है. पेंशन और टीवीएनएल का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, पेंशन का मामला 2000 करोड़ रुपए का है. इसके अलावा रांची के बोकारो और जमशेदपुर स्थित डेयरी प्लांट और होटवार में स्थापित पशु आहार कारखाना का स्वामित्व अभी भी बिहार सरकार के पास है. झारखंड सरकार का कहना है कि झारखंड में स्थित डेयरी प्लांट और पशु आहार कारखाने पर झारखंड का हक है. इसी तरह दिल्ली स्थित बिहार भवन में भी झारखंड को हिस्सा मिलना चाहिए.

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टीवीएनएल एक नजर में

तेनुघाट विद्युत निगम की स्थापना 26 नवंबर 1987 में की गई थी. तेनुघाट विद्युत निगम 2047 करोड़ का उपक्रम है. निगम के हिस्से की पूंजी लगभग 105 करोड़ है. कंपनी के इकरारनामा के समय बिहार सरकार ने 100 करोड़ रुपए का शेयर कैपिटल निर्धारित किया था. 1550 मेगावाट क्षमता वाले टीवीएनएल को तीन चरण में यूनिटों को पूरा करना था. पहले चरण में 210 मेगावाट की दो यूनिट, द्वितीय चरण में 210 मेगावाट की तीन यूनिट, तीसरे चरण में 250 मेगावाट की दो यूनिट का निर्माण होना था. लेकिन यह काम पूरा नहीं हुआ. दूसरे चरण का काम भी शुरू नहीं हुआ है.

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