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Ranchi, 5 September: राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए राज्य सरकार ने कवायद तेज कर दी है. यह अच्छी बात है, लेकिन अभी स्मार्ट सिटी को लेकर तैयारी पूरी हुई भी नहीं कि मुख्यमंत्री रघुवर दास दिल्ली जाकर उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू को स्मार्ट सिटी का शिलान्यास करने का न्योता दे आये. उपराष्ट्रपति 9 सितंबर को स्मार्ट सिटी का शिलान्यास करने रांची आ रहे हैं. शिलान्यास होने में अब सिर्फ 5 दिन ही बचे हैं, लेकिन अभी तक नगर विकास विभाग की तैयारी पूरी नहीं हुई है. डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) अबतक पूरा नहीं हुआ है. प्रदूषण बोर्ड और वन विभाग की एनओसी भी नहीं मिली है. स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के सीईओ की भी बहाली की प्रक्रिया चल ही रही है. अभी इंटरव्यू का रिजल्ट आना बाकी है. रिजल्ट आने के बाद शिलान्यास के समय में सीईओ को सामने लाकर खड़ा कर दिया जायेगा. इधर जुडको भी जल्द से जल्द अधूरे कामों को निपटाने में लगी है. सोमवार को भी स्मार्ट सिटी को लेकर जुड़को अधिकारियों की लंबी बैठक चली.
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आखिर अंतिम समय में सीईओ की नियुक्ति क्यों ?
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झारखंड में योजनाएं तो बहुत बनती है, लेकिन योजनाएं दूरदर्शी सोच के तहत नहीं बनती. महीनों से स्मार्ट सिटी की तैयारी चल रही है. नगर विकास विभाग के अंतर्गत जुडको इस पूरे प्रोजेक्ट को देख रहा है. विभाग के मंत्री, अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी भी किसी न किसी रूप में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल हैं. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री भी इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं. स्मार्ट सिटी का पूरा प्लान बन गया. विभाग के मुताबिक सबकुछ तैयार है. अब सवाल यह उठता है कि पहले से सीईओ की नियुक्ति क्यों नहीं की गयी. अब दिक्कत यह होगी की नये सीईओ को स्मार्ट सिटी का पूरा प्लान समझना होगा और उसपर काम करना होगा. अगर पहले से सीईओ की नियुक्ति हो गयी होती तो ऐसी दिक्कत नहीं आती.
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अबतक सुझाव ही ले रहा है नगर विकास विभाग
स्मार्ट सिटी कैसी होनी चाहिए नगर विकास विभाग अबतक इसपर सुझाव ही ले रहा है. अबतक जो सुझाव विभाग को मिले हैं उसका अध्ययन विभाग कर रही है. नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव अरूण कुमार ने कहा है कि जरूरत होने पर सुझाव के हिसाब से स्मार्ट सिटी के डिजाईन में बदलाव किये जायेंगे. इसका मतलब साफ है नगर विकास विभाग ने डिजाइन पर भी वर्क नहीं किया है. जो बेहतर डिजाइन मिलेगा उसको अपनाने के लिए विभाग तैयार है.
656 एकड़ जमीन पर बनेगा स्मार्ट सिटी
धुर्वा में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के लिए एचईसी की 656 एकड़ जमीन के बदले नगर विकास विभाग एचईसी को 721.93 करोड़ देगी. रिवाइवल पैकेज के तहत एचईसी को 1.10 करोड़ रुपए प्रति एकड़ की दर से पैसा मिलेगा. पिछले मंगलवार को इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है. गौरतलब है कि पहले 441 एकड़ जमीन पर स्मार्ट सिटी और लाइट मेट्रो प्रोजेक्ट को लागू करने की योजना थी. इस पर कैबिनेट की स्वीकृति भी मिल गई थी, लेकिन बाद में भू राजस्व विभाग को दिए जाने वाले 215 एकड़ जमीन को भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया. इस वजह से कैबिनेट से दोबारा सहमति ली गई. एचईसी से जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया उद्योग विभाग के द्वारा की जा रही है, इसलिए एचईसी को दी जाने वाली राशि भी उद्योग विभाग के माध्यम से दी जाएगी. मालूम हो कि एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत खाली जमीन पर स्मार्ट सिटी बनेगी. इसका मास्टर प्लान बन गया है. स्टेक होल्डर की बैठक में मास्टर प्लान पर स्वीकृति भी मिल गई है.
इतनी स्मार्ट होगी स्मार्ट सिटी
प्रस्तावित स्मार्ट सिटी में कन्वेंशन सेंटर और अर्बन टावर का निर्माण पीपीपी मोड पर होगा. जहां स्मार्ट सिटी में चार द्वार होंगे, वहीं यह सिटी चारों ओर बाउंड्री वाल से घिरी होगी. बिजली के लिए स्मार्ट ग्रिड, कार्बन फ्री जोन, चौड़ी सड़कें, इकोलॉजिकल पार्क, बेहतर सीवरेज आदि इसकी खासियत होगी. एक प्रवेश द्वारा से हटिया रेलवे स्टेशन की दूरी 0.5 किमी होगी. यहां से एयरपोर्ट की दूरी दो किमी होगी है. यहां रिबूस्ट आइटी कनेक्टिविटी एंड डिजिटाइजेशन, सोलेर जेनेरेट इलेक्ट्रिसिटी, डक्ट केबलिंग, वेस्ट वाटर रिसाइक्लिंग, स्मार्ट मीटरिंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, एनर्जी एफिशियेंट स्ट्रीट लाइटिंग, सेफ्टी एंड सिक्यूरिटी फॉर सिटिजन, वाल्काबिलिटी एंड साइकलिंग,सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, नो व्हीकल जोन, इंटलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, सेनिटेशन, पेडेस्ट्रीयन पाथ वे, रिवर फ्रंट, पार्क और ओपन स्पेस की सुविधा होगी. सभी जगह सीसीटीवी के सर्विलांस में होंगे.
191.64 करोड़ से बनेगा अरबन सिविक टावर
स्मार्ट सिटी में 191.64 करोड़ की लागत से अरबन सिविक टावर बनाने का काम शापोरजी पालोन जी को दिया गया है. वहीं, 106 करोड़ की लागत से झारखंड अरबन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी बनेगा. केएमवी प्रोजेक्ट लिमिटेड को इसका काम दिया गया है. यहां हाइ क्वालिटी की लाइफ होगी. जिसमें बिजनेस, हेल्थ, एजुकेशन से लेकर हाउसिंग तक की व्यवस्था होगी. स्मार्ट सिटी में कुल 86.5 एकड़ में आवासीय परिसर का निर्माण होगा. स्मार्ट सिटी की सड़कें 40 मीटर चौड़ी होंगी. स्मार्ट सिटी के कुल 67.7 एकड़ क्षेत्रफल कॉमर्शियल के लिए चिह्नित किया गया है. जहां कॉमर्शियल ऑफिस, फाइव स्टार होटल, रिटेल मॉल, कॉमर्शियल टावर, हाट, वेंडिंग एरिया, लोकल शॉपिंग सेंटर आदि बनेंगे. स्मार्ट सिटी में 245.05 एकड़ का क्षेत्र खुला होगा.
कहीं कागजों और ग्राफिक्स में सिमटकर न रह जाये स्मार्ट सिटी की खूबसूरती
स्मार्ट सिटी के लिए जो मास्टर प्लान बना है, उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि यह स्मार्ट सिटी बिल्कुल हाईटेक और खूबसूरत होगी, लेकिन यह तभी संभव होगा जब नगर विकास विभाग की प्लानिंग जमीन पर उतरेगी. कागजों और ग्राफिक्स में तो स्मार्ट सिटी का मास्टर प्लान काफी आकर्षक नजर आ रहा है, लेकिन नगर विकास विभाग की जो गति दिख रही है. उसे देखकर यह आशंका जतायी जा रही है कि कहीं स्मार्ट सिटी की यह खूबसूरती सिर्फ कागजों और ग्राफिक्स तक ही सिमट कर न रह जाये.




