रांची संवाददाता न्यूज़ विंग : बालू माफियाओं से निपटने के लिए सरकार अब बालू घाटों की निलामी नहीं करवायेगी, दरअसल सत्ताधारी दल बीजेपी ने फैसला किया है कि अब राज्य के बालूघाटों की निलामी नहीं की जायेगी और बालू निकलवाने की जिम्मेवारी स्थानीय ग्राम पंचायतों को सौंपी जायेगी मतलब अब बालू निकालने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के फैसले के बाद सरकार जल्द ही इस तरह का प्रस्ताव कैबिनेट में लायेगी. इस फैसले का दूसरा पहलू यह है कि बालूघाटों पर कब्जे को लेकर ग्रामीणों में वर्चस्व की लड़ाई शुरू होने की आशंका है. बालू कारोबार में लगे लोगों के अनुसार, कारोबारियों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन ग्रामीणों के बीच सिर फुटव्वल की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी. बालूघाटों पर कब्जा करने के लिए जोर आजमाईस होगी और ठेका नहीं मिलने की स्थिति में लोग एक दुसरे के जान के दुश्मन बन जायेंगे. गांवो में शांति भंग होने का खतरा भी उत्पन्न हो जायेगा. बालू के ठेकेदार बताते है कि सरकार के इस निर्णय से बालू के रेट में मामूली गिरावट आयेगी लेकिन बालू से माफिया लोगों को ही ज्यादा फायदा होने वाला है. बालू की उपलब्धता ग्राम पंचायत के विवेक पर निर्भर करेगा. ठेकेदार अनिल सेठ, सुरेश साव की मानें तो सरकार के निर्णय से बालू तो थोड़ा सस्ता होगा जरूर लेकिन माफिआ राज नहीं खत्म होगा. पंचायत के मुखिया अपनी मनमानी करेंगे. मतलब साफ है जिसकी लाठी उसकी भैंस होगी. सरकार के इस निर्णय से कोई सुशासन नहीं आने वाला है.
झारखंड में बालू का कारोबार सलाना- 4500-500 करोड
प्रतिदिन ढुलाई – 6-7 हजार ट्रक
एक ट्रक बालू की वर्तमान कीमत – 10-12 हजार रूपये
बीते 13 वर्षो में आय – 6.25 करोड़ सलाना
पिछले वर्ष का आय – 200 करोड़
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने साफ संकेत दे दिया है कि बालू का अधिकार अब सीधे ग्राम पंचायत के पास होगा. उन्होंने कहा कि जल्द ही इसे कैबिनेट में ले जाया जायेगा.
झारखंड का पैसा राज्य में ही रहेगा
बालूघाट ग्राम पंचायत के पास आने के बाद राजस्व इसी राज्य में रहेगा. यहां का पैसा बाहरी लोगों की तिजोरी में नहीं जा पायेगा. लेकिन राजस्व में गिरावट आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.




