
New Delhi : टूजी स्पैक्ट्रम आवंटन घोटाला मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत ने आज गुरुवार को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, द्रमुक सांसद कनिमोई और कई अन्य पर फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया है. घोटाले में कुल 17 लोगों को बरी किया गया है. ये पूरा घोटाला 1.76 लाख करोड़ का है. लगभग सात साल तक सुनवाई करने के बाद पटियाला हाऊस कोर्ट स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने सभी को बरी कर दिया है. ज्ञात हो कि इसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक सांसद कनीमोई के अलावा अन्य को आरोपी बनाया गया था.
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2011 में सीबीआई ने दाखिला किया था आरोपपत्र
गौरतलब है कि सीबीआई ने 2जी घोटाला मामले में अप्रैल 2011 में आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस जारी करने में गड़बड़ी के कारण 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2012 को लाइसेंस को रद कर दिया था. 2010 भारत के महालेखा नियंत्रक और परीक्षक यानि कैग ने स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में धांधली की बात कही थी इसके साथ अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने को एक लाख 76 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया था.
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क्या-क्या थे आरोप
सीबीआई की विशेष अदालत के द्वारा आरोपियों पर जो आरोप लगाए गये वो आईपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ मनीलांड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत तय किए गए थे. इन पर आपराधिक षडयंत्र रचने, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने, पद का दुरुपयोग करने और घूस लेने जैसे आरोप लगाए गए थे.
क्या रहा विशेष अदालत का फैसला
2जी स्कैम मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ सीबीआइ पुख्ता सबूत नहीं पेश कर सकी. फैसला सुनाते हुए जज ओ. पी. सैनी ने कहा कि पैसों का लेनदेन साबित नहीं हो सका इसलिए मैं सभी आरोपियों को बरी कर रहा हूं. फैसले की सबसे खास बात यह रही कि कोर्ट ने कहा कि घोटाला हुआ ही नहीं. साथ ही कोर्ट ने कहा कि आरोपों के हिसाब से एजेंसियां सबूत पेश करने में नाकाम रही.
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फैसले के बाद आरोपियों ने क्या कहा
कोर्ट के फैसले के बाद मामले के आरोपी कनिमोझी ने कहा कि मैं फैसले से खुश हूं और सभी का धन्यवाद करती हूं. वहीं ए राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा कि इस तरह के मामलों में समय लग सकता है. लेकिन हकीकत सामने आ ही जाती है. ए राजा के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए लेकिन सीबीआई की तरफ से साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके. ए राजा और कनिमोझी पर 200 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप था
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