कोलकाता : शहर के पॉश इलाके के बिधाननगर नगर निगम के लिए हुए मतदान को कवर करने के दौरान किए गए हमले में कम से कम 15 पत्रकार, फोटो पत्रकार और टीवी चैनलों के कैमरामैन शनिवार को घायल हो गए।
हमले को पूर्व नियोजित करार देते हुए जी 24 घंटा और एबीपी आनंद ने कहा है कि राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने हमले को अंजाम दिया है।
इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना की जांच के आदेश दिए, जबकि विपक्ष ने मीडिया पर हमले के लिए तृणमूल कांग्रेस पर जमकर हमला किया।
एबीपी आनंद के दो पत्रकार -अरित्रक भट्टाचार्य और प्रकाश सिन्हा- और चैनल के कैमरामैन पार्था सारथी चक्रबर्ती पर एक भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वे बिधाननगर इलाके में वार्ड संख्या 31 में बूथ कैप्चरिंग को कवर कर रहे थे।
24घंटा के एक पत्रकार बिक्रम दास और कैमरामैन मिंटू बसाक भी इसी हमले में घायल हो गए।
रक्तरंजित भट्टाचार्य ने कहा, “जैसे ही हमने एक बूथ को जाम करने की घटना रिकार्ड की, गुंडों के एक गिरोह ने मुझ पर और कैमरामैन पर हमला बोल दिया।”
चैनल ने कहा है कि चक्रबर्ती को लाठी-डंडों से पीटा गया और वह बेहोश हो गए थे।
बसाक के सिर पर एक हेलमेट से हमला किया गया और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
24 घंटा की एक महिला संवाददाता ने कहा कि एक बूथ में अवैध तरीके से घुस आए एक गिरोह के लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म करने की धमकी दी और उसे लगातार गालियां दी।
हमले के शिकार हुए अन्य पत्रकारों में कोलकाता टीवी के तन्मय दत्ता और शर्मिन बेगम, न्यूजटाइम के अरक डे और दीपांकर जेना, और द टेलीग्राफ के फोटो पत्रकार संजय चटर्जी, ईटीवी न्यूज बांग्ला के अतिरथ घोष, तुहिन दास चंद्रा, सूरज प्रसाद गुप्ता और आनंद बाजार पत्रिका के सौविक डे शामिल हैं।
एबीपी आनंद और 24 घंटा द्वारा प्रसारित टीवी फुटेज में तृणमूल कांग्रेस के बिधाननगर के विधायक सुजित बोस हमले के समय घटनास्थल पर मौजूद दिखाई दे रहे थे।
बिधाननगर के पुलिस आयुक्त जावेद शमीम ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
उन्होंने कहा, “हम मामले की जांच कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराता है तो हम कार्रवाई करेंगे।”
शिक्षा एवं संसदीय मामलों के मंत्री पार्था चटर्जी ने मीडियाकर्मियों से कहा, “हम मीडिया के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हैं। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं।”
उन्होंने कहा, “प्रशासन घटना के कारणों, परिस्थितियों की जांच करेगा। हम घटना को भड़काने वालों का भी पता लगाएंगे, और इस पहलू की भी जांच करेंगे कि कहीं किसी राजनीति दल, या किसी अन्य निहित स्वार्थी समूह ने हिंसा को तो नहीं भड़काया।”
उन्होंने आरोप लगाया, “विपक्षी दलों -माकपा, भाजपा और कांग्रेस- के पास लोग नहीं हैं। उनके पीछे जनसमर्थन नहीं है। इसलिए पिछले कुछ दिनों से वे लोकतंत्र को नष्ट करने जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।”
माकपा और कांग्रेस ने तृणमूल की इस घटना के लिए निंदा की है।
माकपा के मेयर उम्मीदवार और पूर्व मंत्री असिम दासगुप्ता ने कहा, “रिपोर्टिग उनकी आजीविका है, लोगों तक खबर पहुंचाना उनका कर्तव्य है। पत्रकार जब सच परोस रहे हैं तो तृणमूल डरी क्यों हुई है? पत्रकारों पर यह घृणित हमला क्यों? जनता सबकुछ देख रही है।”
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “चुनाव रद्द कर दिया जाना चाहिए और भारत निर्वाचन आयोग की निगरानी में फिर से चुनाव कराया जाना चाहिए।”




