– सीआरपी-बीआरपी महासंघ, झारखंड टूट की कगार पर
Akshay Kumar Jha
Ranchi, 19 September: ऊठ के मुंह में जीरा. कुछ ऐसा ही हुआ है पारा शिक्षकों के साथ. शिक्षा परियोजना परिषद कार्यकारिणी ने उनके वेतन में मामूली वृद्धि करते हुए 10 फीसदी का इजाफा किया है. इस वृद्धि से पारा शिक्षक के सभी संघ काफी नाराज हैं. बताते चलें कि पारा शिक्षकों के कुल पांच संघ है. इनमें इंटर अनट्रेंड, इंटर टेंड्र (टेट), स्नातक टेंड्र और स्नातक (टेट) है. बीआरपी-सीआरपी का अपना अलग संघ है. संघ के अधिकारियों का कहना है कि ऐसा करना हमारे साथ मजाक करने जैसा है. क्योंकि, पहले से ही हमारा वेतन काफी कम है. ऐसे में इतना कम इजाफा कर के सरकार ने हमारे साथ मजाक किया है.
पहले और अब के वेतन में क्या फर्क पड़ा
कैटेगरी पहले का मानदेय वर्तमान मानदेय
इंटर अनट्रेंड 7480 8228
इंटर टेंड्र (टेट) 8140 8954
स्नातक टेंड्र 8800 9680
स्नातक (टेट) 9240 10164
बीआरपी 11450 12595
सीआरपी 10890 11979
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था कि समान काम के लिए समान वेतन दिया जाएगा. लेकिन, पारा शिक्षकों के वेतन वृद्धि मामले में ऐसा नहीं हुआ है. सरकारी शिक्षकों और पारा शिक्षकों के वेतनमान में काफी अंतर है. वेतन वृद्धि के बाद सभी संध के अधिकारियों का कहना है कि कार्यकारिणी की बैठक में ऐसा फैसला लेकर सरकार ने एक तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवहेलना किया है.
किसने क्या कहा
पंकज शुक्ला (अध्यक्ष, बीआरपी-सीआरपी महासंघ, झारखंड)
सरकार ने पारा शिक्षकों की एक भी मांग पूरी नहीं की है. कहा गया था कि अनुश्रवण मद के लिए बीआरपी को हर महीने 1000 रुपए और सीआरपी को 600 रुपए मिलेंगे. जिसे लेकर कार्यकारिणी की बैठक में कोई फैसला नहीं लिया गया. वेतनमान में मामूली वृद्धि कर के सरकार ने पारा शिक्षकों का मनोबल तोड़ा है. सरकार ने वादा किया था कि एक कमेटी गठन किया जाएगा जो पारा शिक्षकों के लिए नियमावली तैयार करेगी. वो भी मांग पूरी नहीं की गयी.
विक्रांत ज्योती (संरक्षक, झारखंड प्रदेश पारा शिक्षक महासंघ)
कार्यकारिणी से पारा शिक्षकों को काफी उम्मीद थी. लेकिन, एक भी माग पूरी नहीं की गयी है. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना भी की गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि समान काम के लिए समान भुगतान होना चाहिए फिर सरकार पारा शिक्षकों के साथ ऐसा क्यों कर रही है. ये बहुमत की सरकार है. हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे मांगों पर जरूर गौर करेगी.
टूट के कगार पर बीआरपी-सीआरपी महासंघ
ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही पारा शिक्षकों का बीआरपी-सीआरपी महासंघ टूट कर दो भाग में बंट जाएगा. सूत्रों की माने तो दो फाड़ में महासंघ बंट भी चुका है. सिर्फ कागजी काम बाकी है. एक ग्रुप को लीड पुराने मुखिया पंकज शुक्ला कर रहे हैं. वहीं दूसरी कमान रांची के सीआरपी नितिन कुमार के हाथों में है. बताया जा रहा है कि नितिन के पास 17 जिलों के सीआरपी का साथ है. वहीं महासंघ के मौजूद अध्यक्ष के पास सिर्फ 7 जिलों का साथ रह गया है.
मौजूदा अध्यक्ष करते हैं इनकार
बीआरपी-सीआरपी महासंघ के अध्यक्ष पंकज शुक्ला का इस मामले पर कहना है कि संघ में किसी तरह की कोई फूट नहीं है. यह कहना सरासर गलत है कि संघ दो भाग में बंटा हुआ है. संघ मजबूती से अपना काम कर रहा है. और आगे भी करता रहेगा. हमारे सारे सदस्य साथी संघ के साथ हैं.
सीआरपी के फोन कॉल से परेशान हो गए हैं निदेशक
बीआरपी-सीआरपी महासंघ ने अपने संघ के सदस्यों से लंबित मांगों को पूरा करने के लिए 2000-2000 रुपए प्रति सदस्य की मांग की थी. कई सदस्यों ने यह रकम महासंघ के अधिकारियों को दे भी दी. लेकिन, मांग पूरे नहीं हुए. इधर पैसे देने के बाद सदस्य खुद से ही शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारी, यहां तक की निदेशक को भी फोन करने लगे और लंबित मांगों को पूरा करने का दवाब बनाने लगे. इससे संघ के लोग आपस में ही आमने-सामने हो गए और अब बात टूट तक पहुंच गयी है.
अध्यक्ष के परामर्शदाताओं से परेशान है सदस्य
महासंघ के सदस्य अध्यक्ष के चार परामर्शदाताओं से परेशान हैं. सदस्यों का कहा है कि उनकी संघ में नहीं चलती है. अध्यक्ष अपने आस-पास के लोगों से परामर्श लेकर ही सारा काम करते हैं. सूत्रों की माने तो संघ के कमलेश पांडे, अमर खत्री, गणेश गौतम और विनय हलधर की बातों को संघ के अध्यक्ष ज्यादा तवज्जो देते हैं. उनकी ही बात संघ में चलती है बाकी की नहीं.




