Uncategorized

नीतीश को बहुमत सिद्ध करने की होगी चुनौती, फ्लोर टेस्ट कल

मृत्युंजय श्रीवास्तव
रांची, 27 जुलाई: 24 घंटे तक चले सियासी ड्रामे के बाद नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. नीतीश के साथ ही सुशील मोदी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. अब नीतीश कुमार के सामने बस विधानसभा में बहुमत पेश करने की चुनौती है. 28 जुलाई को विधानसभा में बहुमत पेश करना है. सुशील मोदी ने बीजेपी और जेडीयू के पास 132 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है लेकिन जेडीयू में लगातार बगावती सुर दिखाई दे रहे हैं.

जदयू के 5 मुस्लिम, 11 यादव विधायक बिगाड़ सकते हैं नीतीश का गेम !

सूत्रों की मानें तो जदयू के 71 में 18 विधायक राजद का समर्थन कर सकते हैं, इनमें से 5 विधायक मुस्लिम हैं और 11 विधायक यादव समुदाय से हैं. दो अन्य विधायक भी राजद के संपर्क में हैं. पार्टी विधायक बिजेंद्र यादव ने कहा कि बिहार की जनता ने नीतीश और लालू को एक साथ चुना था, अब नीतीश के पास सबसे बड़ी चुनौती बहुमत सिद्ध करने की है.

सीटों का समीकरण

कुल सीटें – 243

बहुमत के लिए – 122

जदयू – 71

भाजपा़+ 58

राजद – 80

कांग्रेस – 27

अन्य – 7

जेडीयू के अंदर बगावती तेवर, टूट-फूट की आशंका

दरअसल नीतीश कुमार के इस फैसले का पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव और राज्यसभा सांसद अली अनवर का विरोध किया है. शरद यादव ने कहा कि इस फैसले से गलत संदेश जाएगा. वहीं अली अनवर ने कहा कि मेरी अंतरात्मा इस फैसले के साथ नहीं है. अली अनवर ने ये भी कहा कि पिछले काफी दिनों से बीजेपी के साथ जाने के संकेत मिल रहे थे. 23 जुलाई को नेशनल काउंसिल की बैठक होनी थी लेकिन रद्द कर दी गई. अगर मैं बैठक में होता तो इस बात को जरूर सामने रखता हालांकि जेडीयू नेता केसी त्यागी ने शरद यादव से फोन पर बात की है. उन्हें मनाने की कोशिश की है. ऐसे में अंकों का गणित महत्वूर्ण हो जाता है. जेडीयू विधायकों पर शरद यादव का अपना प्रभाव है. अली अनवर बिहार में पसमांदा मुस्लिमों की राजनीति करते रहे हैं. नीतीश कुमार ने उनको राज्यसभा भेजा, लेकिन अली अनवर की नाराजगी बताती है कि जेडीयू में सब ठीक नहीं है. पार्टी में टूट-फूट की संभावना प्रबल हो गयी है.

रांची में बैठकर नीतीश का खेल बिगाड़ सकते है लालू

दूसरी ओर जब से शरद यादव से जेडीयू के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नीतीश ने अपने कंधे पर ली, शरद यादव को कोई पूछने वाला नहीं है. दूसरी ओर राजनीतिक वनवास की कगार पर खड़े लालू यादव भी चुप नहीं बैठने वाले. राजद सुप्रीमो बहुमत परीक्षण रूपी आखिरी मौके पर अपनी पूरी ताकत से खेल सकते हैं. बहरहाल लालू चारा घोटाले की मार झेल रहे हैं और इस संकट की घड़ी में राज्य, परिवार और पार्टी से दूर हैं हालांकि सियासी चाल चलने में लालू का कोई सानी नहीं है. कोई भी बाज़ी पलटने की मादा रखते हैं लालू, फिलहाल लालू के परिवार का राजनीतिक कैरियर दाव पर लग गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button